'यहां भाषण मत दीजिए!', जंतर-मंतर हिंसा पर दिल्ली HC की याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने 20 जुलाई की झड़पों के दौरान पुलिस पर हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि यदि मामला जनहित का है तो इसे PIL के रूप में दायर किया जाए और याचिका को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया.

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20 जुलाई को प्रदर्शनकारी से हुई झड़प में महिला पुलिसकर्मी घायल हो गईं थी (Photo: PTI) 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी से हुई झड़प में महिला पुलिसकर्मी घायल हो गईं थी (Photo: PTI)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 24 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:58 PM IST

दिल्ली हाई कोर्ट ने एनजीओ सेव इंडिया फाउंडेशन की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है जिसमें 20 जुलाई को हुई हिंसा के दौरान पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच की मांग की गई थी. 

सिंगल जज बेंच ने कहा कि जनहित याचिका की सुनवाई सिंगल जज बेंच नहीं कर सकती. इसके बाद कोर्ट ने याचिका को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया ताकि इसे प्रदर्शनों से जुड़ी बाकी याचिकाओं के साथ सुना जा सके.

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि हाल ही में पुलिस पर हमले हुए हैं और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है. उन्होंने कोर्ट से इस मामले में सख्त निर्देश देने की मांग की. 

इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से इस मामले से प्रभावित हैं तो वे धारा 163 के तहत आवेदन दे सकते हैं. वहीं अगर उनका कोई व्यक्तिगत हित इस मामले में नहीं जुड़ा है तो उन्हें जनहित याचिका दाखिल करनी होगी. 

दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर नंद किशोर सिंह (Photo: PTI)


कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता किसी खास घटना की बात कर रहे हैं तो उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत के लिए आवेदन देना चाहिए.

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सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को जानकारी दी कि इसी तरह का एक और मामला चीफ जस्टिस की अदालत में पहले से सुना जा रहा है और उसमें से एक मामला आज दोपहर ढाई बजे सूचीबद्ध है. 

उन्होंने सुझाव दिया कि सभी संबंधित मामलों की सुनवाई एक ही कोर्ट में होनी चाहिए. इस पर जस्टिस जालान ने भी कहा कि उन्हें पहले से ही यह लग रहा था कि इस तरह की जनहित याचिका पर सिंगल जज बेंच सुनवाई कैसे कर सकती है.

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में कहा कि भीड़ की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए. इस पर हाई कोर्ट ने वकील को टोकते हुए कहा कि कोर्ट में सामान्य भाषण देने की जरूरत नहीं है और कोर्ट तय प्रक्रिया के अनुसार ही काम करेगा. 

कोर्ट ने साफ कहा कि यहां कहानियां बनाने की जरूरत नहीं है. अंत में कोर्ट ने याचिका को चीफ जस्टिस की अदालत भेजने का आदेश दिया ताकि 20 जुलाई की घटना से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो सके.

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