बच्ची के हाथ पर रखे अंगारे, गले पर चाकू...चोरी के शक में 8 साल की मासूम से टॉर्चर

आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के दाराकोंडा गांव से एक आठ वर्षीय बच्ची के साथ कथित क्रूरता का मामला सामने आया है. चोरी के शक में एक महिला पर बच्ची को प्रताड़ित करने का आरोप लगा है. घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. यह मामला बच्चों के अधिकारों और उनके संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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चोरी के शक में 8 साल की मासूम से टॉर्चर (Photo: itg) चोरी के शक में 8 साल की मासूम से टॉर्चर (Photo: itg)

अपूर्वा जयचंद्रन

  • दाराकोंडा,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:41 PM IST

आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के जीके वीधी मंडल के दाराकोंडा गांव से एक बेहद डरा देने वाला मामला सामने आया है. यहां आठ साल की एक बच्ची के साथ कथित तौर पर मारपीट, अंगारों से जलाने और टॉर्चर किए जाने का आरोप है. बच्ची पर चोरी का शक जताया गया और इसी संदेह के आधार पर उसके साथ इस अमानवीय व्यवहार की शिकायत पुलिस तक पहुंची है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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जानकारी के अनुसार, पीड़ित बच्ची चौथी कक्षा की छात्रा है. उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका है. परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए वह स्थानीय पादरी के परिवार के संरक्षण में रह रही थी. करीब दस दिन पहले पादरी के घर से 10 हजार रुपये नकद गायब होने के बाद बच्ची पर संदेह किया गया.

परिजनों का आरोप है कि पादरी के घर आने-जाने वाली रुपावती नाम की महिला बच्ची को अपने घर ले गई. शिकायत के अनुसार, वहां उससे पैसे के बारे में पूछताछ की गई और कथित तौर पर जुर्म कबूल कराने के लिए उसके साथ टॉर्चर किया गया. आरोप है कि बच्ची के हाथों को अंगारों से जलाया गया और उसे डराने के लिए उसकी गर्दन पर चाकू तक रख दिया गया. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी.

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घटना के बाद घायल बच्ची को दाराकोंडा सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है. इसके बाद परिजनों ने जीके वीधी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया है और सभी के बयान दर्ज किए जा रहे हैं.

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीण और आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि भी जुट गए. उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

यह घटना केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है. किसी भी बच्चे को केवल संदेह के आधार पर प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है.  
 

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