अमेरिका में जिंदगी की जंग लड़ रहे आंध्र प्रदेश के एक कैंसर पेशेंट ने अपने घर लौटने के लिए सरकार से मदद मांगी है. भारत नाम के इस शख्स ने सोशल मीडिया के जरिए आंध्र प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से भावुक अपील की है. उनका कहना है कि वह एडवांस्ड लिवर कैंसर से जूझ रहे हैं और अब उनकी हालत इतनी गंभीर हो गई है कि सामान्य विमान से भारत लौटना उनके लिए संभव नहीं है.
भारत के मुताबिक, उन्हें हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा यानी HCC है. यह लिवर कैंसर का एक प्रमुख प्रकार है. वह पिछले करीब चार साल से इस बीमारी का इलाज करा रहे हैं. अमेरिका में इलाज के दौरान अब डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताया है. ऐसे में भारत की इच्छा है कि वह अपने जीवन का बचा हुआ समय अपने परिवार और प्रियजनों के साथ बिताएं.
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भारत ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है. उनकी अपील में बीमारी का दर्द है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा घर लौटने की बेचैनी नजर आती है. उनका कहना है कि डॉक्टरों ने उनकी हालत को गंभीर बताया है. ऐसे में वह अपने जीवन का बचा हुआ समय अपने परिवार और प्रियजनों के साथ बिताना चाहते हैं. लेकिन यहां एक बड़ी मुश्किल है. भारत सामान्य कमर्शियल फ्लाइट से सफर नहीं कर सकते.
उनकी मेडिकल स्थिति ऐसी नहीं है कि वह आम यात्रियों की तरह विमान में बैठकर अमेरिका से भारत की लंबी यात्रा कर सकें. इसलिए अब उन्हें मेडिकल एयर ट्रांसपोर्ट या एयर एंबुलेंस की जरूरत है. घर तो हजारों किलोमीटर दूर है, लेकिन घर पहुंचने का रास्ता भी आसान नहीं है.
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भारत ने कहा कि वह आंध्र प्रदेश लौटना चाहते हैं. उनके लिए यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि परिवार के पास वापस पहुंचने की आखिरी कोशिश है. उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और राज्य सरकार के अधिकारियों से मदद की अपील की है. साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस मामले में उन्हें अमेरिका से भारत वापस लाने की व्यवस्था कराने की गुहार लगाई है.
भारत ने वीडियो में कहा कि उनके लिए परिवार से दोबारा मिलना और उनके साथ बचा हुआ समय बिताना ही एक दिली इच्छा है. भारत ने लोगों से भी अनुरोध किया है कि वे उनकी अपील को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि यह संबंधित अधिकारियों तक पहुंच सके और उन्हें समय पर मदद मिल सके. भारत का कहना है कि अगर समय रहते एयर एंबुलेंस या किसी अन्य मेडिकल एयर ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था हो जाती है, तो वह अपने घर लौट सकते हैं. उनकी पूरी कोशिश यही है कि बीमारी की गंभीर स्थिति के बीच वह अपने परिवार तक पहुंच सकें.
अब्दुल बशीर