महिला पहलवानों के आरोपों से अदालत में बाइज्जत बरी हुए बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने आजतक से खास बातचीत की. इस इंटरव्यू में उन्होंने अदालत के फैसले, अपने खिलाफ रची गई साज़िश और आगे की सियासत को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ पूरा मामला हरियाणा चुनाव जीतने के लिए हुड्डा परिवार की साज़िश थी और अब वे फिर से सांसदी का चुनाव लड़ेंगे.
बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि उनके केस में तीन चरणों में यह साबित हुआ कि किस तरह महिला पहलवानों के आरोपों की साज़िश रची गई थी. उनका कहना है कि हुड्डा परिवार का असली मकसद उनके बहाने भाजपा को निशाना बनाना और हरियाणा का चुनाव जीतना था.
उन्होंने दावा किया कि अदालत में यह पूरी तरह साबित हो गया कि उन्हें किस तरह फंसाया गया. उनके मुताबिक इसके लिए बाकायदा ट्रेनिंग तक कराई गई थी, जिसमें जज, वकील और गवाहों की भूमिका निभाकर सिखाया गया था कि किसे क्या बोलना है. बृजभूषण ने कहा कि उन्होंने खुद को कभी अपराधी नहीं माना, क्योंकि वे अपनी सच्चाई जानते थे.
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उन्होंने यह भी बताया कि आरोप लगाने वालों ने जिन तारीखों और जगहों का जिक्र किया, वे सभी गलत साबित हुईं. एक आरोप के समय वे लखनऊ में थे, जबकि जिस तारीख को कजाकिस्तान में होने की बात कही गई, वह भी झूठी निकली.
बृजभूषण के मुताबिक उनके खिलाफ सपा और लालू यादव की पार्टी समेत लगभग सभी दल विरोध में उतर आए थे, सिर्फ नीतीश कुमार ने ऐसा नहीं किया. देश ही नहीं विदेशों में भी उनके खिलाफ प्रदर्शन हुए और उनके अनुसार यह एक पूरा टूलकिट था जो उनके खिलाफ चलाया गया.
इंटरव्यू में उन्होंने एक कैसेट का भी जिक्र किया, जिसमें बजरंग पुनिया कुछ महिला खिलाड़ियों के इंतजाम की बात करते सुनाई दिए थे और इसे अदालत में भी सुनाया गया. बृजभूषण ने बताया कि आरोप लगाने वाली दो लड़कियों को लेकर अदालत को भी शक हुआ था, जिसके बाद उन्हें चैंबर में बुलाकर पूछताछ की गई. उनके मुताबिक उन लड़कियों ने कहा कि उन्हें बाकी महिला खिलाड़ियों से खतरा महसूस होता है, बृजभूषण सिंह ने उनके साथ कुछ गलत नहीं किया.
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बृजभूषण ने कहा कि वे कई मुकदमे लड़ चुके हैं, लेकिन यह पहला केस है जिसमें उन्हें बेइज्जत होकर बरी होना पड़ा. साथ ही उन्होंने कहा कि इस फैसले से उन्हें खुशी है क्योंकि इससे महिला खिलाड़ियों का सम्मान बढ़ा है, वरना लोग उन्हें शक की नजर से देखते थे.
राजनीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वे अपमानित होकर संसद से निकले थे, इसलिए अब सांसदी का चुनाव जरूर लड़ेंगे और संसद जरूर जाएंगे, चाहे दूसरे ही दिन इस्तीफा क्यों न देना पड़े. उन्होंने कहा कि पार्टी उनके साथ है, तभी उनके बेटे को टिकट दिया गया और उन्हें खुद फोन भी किया गया. योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही दोनों चुनाव लड़े गए थे और उनका कोई मनमुटाव नहीं है. हालांकि किस पार्टी से और कहां से चुनाव लड़ेंगे, इस सवाल को उन्होंने हंसते हुए टाल दिया.
कुमार अभिषेक