नई दिल्ली में हो रहे BRICS समिट के साझा बयान पर सदस्य देशों के बीच सहमति बन गई है. इंडिया टुडे टीवी को मिली जानकारी के मुताबिक, साझा बयान को लेकर बातचीत शनिवार सुबह करीब 4 बजे तक चली. कई मुद्दों पर देशों के बीच मतभेद थे, लेकिन भारत की अगुवाई में लगातार हुई बातचीत के बाद सहमति बनाने में कामयाबी मिली.
जानकारी के मुताबिक, साझा बयान आज शाम 4 बजे जारी किया जा सकता है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि बयान में किसी भी देश की तरफ से की जाने वाली एकतरफा सैन्य कार्रवाई की निंदा की जाएगी, लेकिन किसी खास देश का नाम नहीं लिया जाएगा.
इस बार BRICS के साझा बयान पर पूरी दुनिया की नजर थी. इसकी बड़ी वजह यह है कि संगठन में ईरान और UAE दोनों शामिल हैं, जबकि पश्चिम एशिया में जारी जंग को लेकर दोनों के रुख अलग-अलग हैं. ऐसे में सभी देशों को एक साझा बयान पर लाना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती थी.
भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक कामयाबी
BRICS समिट उसी भारत मंडपम में हो रहा है, जहां 2023 में G20 समिट के दौरान भी भारत ने इसी तरह की कूटनीतिक चुनौती का सामना किया था. उस वक्त रूस-यूक्रेन जंग को लेकर G20 के सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेद थे. अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के एक साथ होने के बावजूद भारत ने लंबी बातचीत के बाद साझा घोषणा पर सहमति बना ली थी.
इस बार भी यूक्रेन और पश्चिम एशिया की जंग, अमेरिका-चीन तनाव और अलग-अलग देशों के हितों के बीच BRICS को एक साझा रुख पर लाना आसान नहीं था. लेकिन भारत की अगुवाई में चली बातचीत के बाद साझा बयान पर सहमति बन गई.
BRICS के नेता आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, फूड सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और वैश्विक संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं. डॉलर पर निर्भरता कम करना भी संगठन के अहम एजेंडे में है.
भारत के लिए यह समिट रूस और ईरान के साथ अपने पुराने रिश्तों को बनाए रखने और साथ ही अमेरिका तथा यूरोप के साथ संबंध मजबूत करने की रणनीति के लिहाज से भी अहम है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की थी. शनिवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी पीएम मोदी की अहम बैठक होनी है.
BRICS के विस्तार के बाद अब इस संगठन के सामने बड़ी चुनौती यह है कि अलग-अलग हितों वाले देशों को साथ रखते हुए ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर कितना मजबूत साझा रुख बनाया जा सकता है. नई दिल्ली समिट में साझा बयान पर बनी सहमति को इसी दिशा में भारत की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है.
प्रणय उपाध्याय