महाराष्ट्र में त्योहारों के दौरान प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियान में मदद के लिए फीस मांगने वाले सेलिब्रिटीज पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है. सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने कहा कि ऐसे लोगों से संपर्क नहीं किया जाना चाहिए, जो इस काम के लिए पैसे मांगते हैं. कोर्ट ने कहा कि उसे उम्मीद थी कि फिल्मी हस्तियां अपने शहर से जुड़ाव और सामाजिक जिम्मेदारी दिखाते हुए इस अभियान में योगदान देंगी.
'फीस लेकर आना चाहते हैं तो हमें खेद है'
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत को बताया कि अधिकारियों ने प्रदूषण के खिलाफ अभियान में सहयोग के लिए कुछ सेलिब्रिटीज से संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने इसके लिए फीस मांगी. इस पर जस्टिस जीएस कुलकर्णी ने कहा कि ऐसे सेलिब्रिटीज के पास जाने की जरूरत नहीं है, जो पैसे लेकर ही अभियान में शामिल होना चाहते हैं.
पीठ ने कहा, 'अगर सेलिब्रिटीज अपने ही शहर के प्रति जागरूक नहीं हैं और वे सिर्फ फीस लेकर आना चाहते हैं, तो हमें बहुत खेद है.' अदालत ने यह भी सवाल किया कि जब ये हस्तियां पुलिस विभाग के कार्यक्रमों में शामिल हो सकती हैं, तो प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियान में क्यों नहीं? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनहित के संदेशों का खर्च सरकारी खजाने पर नहीं डाला जाना चाहिए.
पटाखों और तेज रोशनी पर रोक
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 22 सितंबर को आदेश दिया था कि त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सड़कों और रास्तों पर पटाखे नहीं फोड़े जाएंगे. अदालत ने लेजर लाइट और तेज रोशनी वाली बीम लाइट के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई थी. सोमवार को पीठ ने अधिकारियों से पूछा कि गणपति उत्सव और नवरात्रि के दौरान दिए गए इन आदेशों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए क्या प्रचार-प्रसार किया गया.
यह मामला महाराष्ट्र में त्योहारों और धार्मिक जुलूसों के दौरान होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण को रोकने के लिए अदालत की ओर से स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका से जुड़ा है. कोर्ट का जोर नियमों के प्रचार के साथ उनके पालन और उल्लंघन पर कार्रवाई तय करने पर है.
शिकायत के लिए हेल्पलाइन 1916
सुनवाई के दौरान अदालत की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी अस्पी चिनॉय ने प्रशासन की ओर से दाखिल हलफनामों में शिकायतों के लिए समर्पित और रिकॉर्ड की जाने वाली हेल्पलाइन का स्पष्ट ब्योरा नहीं होने का मुद्दा उठाया. इस पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से पेश वकील जोएल कार्लोस ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी शिकायतें मौजूदा 24 घंटे चालू रहने वाली आपदा हेल्पलाइन 1916 के जरिए दर्ज कराई जा सकती हैं.
झुग्गी बस्तियों में चले जागरूकता अभियान
अदालत ने मुंबई की बड़ी झुग्गी बस्तियों में प्रदूषण संबंधी नियमों के पालन में कमी पर चिंता जताई. पीठ ने कहा कि शहर के आधे से अधिक क्षेत्र में फैली इन बस्तियों में आधी रात को भी पटाखे फोड़ने के नियमों का उल्लंघन हो रहा है. ऐसे इलाकों में लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत है.
जस्टिस जीएस कुलकर्णी ने कहा कि अदालत किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, लेकिन सभी को कानून का पालन करना होगा. पीठ ने नागरिक अधिकारियों को स्थानीय वार्ड पार्षदों को भी अभियान में सक्रिय रूप से शामिल करने का निर्देश दिया.
25 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को तय की है. अदालत ने BMC, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ लगातार निगरानी रखने और नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई में प्रदूषण रोकने के लिए प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों पर आगे विचार किया जाएगा.
विद्या