बिहार के मखाना किसानों के लिए राहत की खबर है. पुर्णिया की धरती पर उगा मखाना अब सात समंदर पार पहुंच चुका है. APEDA यानी एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवेलपमेंट अथॉरिटी के सहयोग से पूर्णिया से 1 मीट्रिक टन मखाने की पहली खेप ग्रीस के लिए रवाना की गई है. इस निर्यात से बिहार के किसानों को बड़ा मौका मिलेगा.
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया X पर यह पोस्ट कर जानकारी दी. सरकार की इस पहल के बाद अब मिथिलांचल के मखाने को दुनिया के बाजार में नई पहचान मिलेगी. अभी तक लोग मखाना को सिर्फ व्रत और बिहार तक सीमित मानते थे. लेकिन धीरे-धीरे इस सुपरफूड ने दुनिया के सामने अपनी पहचान बनाई.
यह प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है. यही वजह है कि यूरोप और अमेरिकी नागरिकों के बीच इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है. अब ग्रीस को भेजी गई यह 1MT की ट्रायल खेप ने किसानों के लिए ब़ड़ा दरवाजा खोला है.
यह भी पढ़ें: बिहार MLC की 8 सीटों पर भी नामांकन का आज आखिरी दिन, 6 सीटों पर महागठबंधन में रार, आरजेडी-कांग्रेस-लेफ्ट में टकराव
किसानों को मिलेगा सही दाम
इस निर्यात से सबसे बड़ा फायदा किसानों को होगा. अब तक मखाना उत्पादक बिचौलियों के जाल में फंसे रहते थे. उन्हें फसल का सही दाम नहीं मिल पाता था. APEDA की इस पहल से किसान सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ेंगे. सरकार का प्लान है कि मखाना उत्पादकों को एक्सपोर्ट की ट्रेनिंग, पैकेजिंग और सर्टिफिकेशन में मदद दी जाए.
इससे पूर्णिया, दरभंगा, मधुबनी और सुपौल के हजारों परिवारों की आय दोगुनी होने की उम्मीद है. बिहार सरकार भी मखाना को GI टैग दिलाकर पहले ही इसकी ब्रांडिंग कर चुकी है.
दुनिया के बाजारों में मखाना बनेगा नया ब्रांड
कभी सिर्फ लोकल मंडियों तक सिमटा हुआ मखाना अब पूरे यूरोप के हेल्थ स्टोर्स में बिकेगा. यह भारत के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन का सबसे बड़ा उदाहरण है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्रीस के बाद अब जर्मनी, अमेरिका और जापान जैसे देशों में भी बिहार के मखाने की डिमांड बढ़ेगी.
aajtak.in