असम में CM की आवाज में ठगी... मिमिक्री आर्टिस्ट से कराई हिमंता बिस्वा सरमा की बात, ACS अफसर देबेश्वर बोरा गिरफ्तार

असम के धेमाजी जिले के डेवलपमेंट कमिश्नर देबेश्वर बोरा को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि उन्होंने नौकरी और ठेके दिलाने के लिए एक मिमिक्री करने वाले शख्स की मदद से लोगों को फोन पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और मुख्य सचिव रवि कोटा की आवाज में बात कराई.

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CM की आवाज फोन पर सुनकर लोगों को लगता था कि देबेश्वर बोरा की पहुंच सरकार के सबसे ऊपर तक है. (Photo: ITG) CM की आवाज फोन पर सुनकर लोगों को लगता था कि देबेश्वर बोरा की पहुंच सरकार के सबसे ऊपर तक है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:02 AM IST

असम के धेमाजी जिले के एक बड़े अफसर को भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि उसने लोगों को नौकरी और ठेके दिलाने का झांसा देने के लिए एक मिमिक्री करने वाले शख्स की मदद ली, जो फोन पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और असम के मुख्य सचिव रवि कोटा जैसे बड़े अफसरों की आवाज में बात करता था. यानी सामने वाले को लगता था कि खुद मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव उससे बात कर रहे हैं, जबकि हकीकत में वह सिर्फ एक नकल उतारने वाला इंसान होता था.

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गिरफ्तार अफसर का नाम देबेश्वर बोरा है. वह धेमाजी जिले के डेवलपमेंट कमिश्नर हैं और 1999 बैच के असम सिविल सर्विस अफसर हैं. उन्हें मुख्यमंत्री की स्पेशल विजिलेंस सेल ने गिरफ्तार किया. उन पर सरकारी पद का गलत इस्तेमाल करने और अपनी आमदनी से कहीं ज्यादा संपत्ति जमा करने का आरोप है.

गिरफ्तारी से पहले विजिलेंस टीम ने धेमाजी और गुवाहाटी में उनके घरों पर तलाशी ली थी और उनसे पूछताछ भी की गई थी. यह पूरा मामला एक डॉक्टर की शिकायत के बाद शुरू हुआ, जिसमें बताया गया था कि जब बोरा मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट में जॉइंट सेक्रेटरी थे, तब वहां कई गड़बड़ियां हुई थीं. बोरा जून 2022 से जुलाई 2025 तक इस पद पर रहे, उसके बाद ही उन्हें धेमाजी का डेवलपमेंट कमिश्नर बनाया गया.

यह भी पढ़ें: 'दिमागी नक्सल' पर लड़ाई हुई तेज, अब चिदंबरम को CM हिमंता ने बताया- 'Pure Naxal'

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अब जांच में एक नया पहलू सामने आया है. बोरा पर आरोप है कि उन्होंने नौकरी और ठेके दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे लिए, और भरोसा जिताने के लिए एक बिचौलिये की मदद ली जो अलग अलग आवाजें निकालने में माहिर था. यह शख्स फोन पर मुख्यमंत्री और दूसरे बड़े अफसरों की आवाज में बात करता था, जिससे लोगों को यकीन हो जाता था कि बोरा की पहुंच सरकार के सबसे ऊपरी स्तर तक है.

यह पूरा खेल तब उजागर हुआ जब बोरा का सामना धेमाजी के एक नेता और कारोबारी से हुआ. जांच अधिकारी अब गुवाहाटी और लखीमपुर में बोरा और उनके परिवार के नाम पर मौजूद संपत्तियों की भी जांच कर रहे हैं.

गौरतलब है कि नवंबर 2020 में, जब बोरा कोकराझार में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर थे, तब एक 32 साल की महिला ने उन पर बलात्कार की कोशिश और अभद्र भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी. उस समय बोरा ने महिला के खिलाफ काउंटर एफआईआर भी दर्ज कराई थी. हालांकि यह मामला मौजूदा जांच से अलग है.

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