बेटियों के उज्ज्वल भविष्य और उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए तंगहाली से जूझ रही एक मां के जज्बे को अब पूरा समाज सलाम कर रहा है. महाराष्ट्र के बीड जिले के अंबाजोगाई में आयोजित 3 किलोमीटर की दौड़ में पहला स्थान हासिल करने वाली रमाबाई रणवीर के संघर्ष की खबर सामने आते ही प्रशासन और सामाजिक संस्थाएं मदद के लिए आगे आई हैं. साल 2012 में पति के निधन के बाद रमाबाई ने अकेले ही अपनी दोनों बेटियों का पालन-पोषण किया. आज उनकी एक बेटी बैंकिंग परीक्षा की और दूसरी पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही है.
बेटियों की पढ़ाई के खर्च का इंतजाम करने के लिए रमाबाई ने 29 अगस्त को अंबाजोगाई में आयोजित 'अमृत दौड़' में हिस्सा लिया था. दौड़ के दौरान पैरों में पहनी प्लास्टिक की चप्पल से असुविधा होने पर उन्होंने चप्पल हाथ में ले ली और नंगे पांव ही दौड़ पड़ीं. रास्ते के नुकीले पत्थर पैरों में चुभते रहे, लेकिन बेटियों के सपनों के आगे उन्होंने दर्द की परवाह नहीं की और 3 किलोमीटर का सफर तय कर पहला स्थान हासिल किया. उन्हें पुरस्कार स्वरूप 3,000 रुपये की राशि मिली. 'आज तक' द्वारा इस खबर को प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद रणवीर परिवार को हर तरफ से सहयोग मिलना शुरू हो गया है.
रमाबाई को अब तक मिल चुकी है लाखों की रुपये की मदद
बीड़ के जिलाधिकारी विवेक जॉनसन ने 50,000 रुपये की आर्थिक मदद दी, जबकि स्थानीय न्यायाधीश ने शैक्षणिक सामग्री भेंट की. केंद्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने 1 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है. कई सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने भी स्वेच्छा से मदद का हाथ बढ़ाया है. समय पर मिली इस मदद से रमाबाई की दोनों बेटियों की पढ़ाई की राह आसान हो गई है. इस संकट के समय में उनकी आवाज बनने के लिए रणवीर परिवार ने 'आज तक' टीवी चैनल का विशेष आभार व्यक्त किया है.
रमाबाई ने कहा है कि जब आज तक ने हमारी खबर दिखाई तब से मदद मिलना शुरू हुआ है. बीड के कलेक्टर साहब ने मुझे सम्मान के साथ पचास हजार रुपये दिए. इसके अलावा जज साहब ने हमारे परिवार को कपड़े, बूट के साथ शैक्षणिक साहित्य दिया है. मैं "आज तक' चैनल का आभार व्यक्त करना चाहती हूं और मैं सरकार से अनुरोध करती हूं कि मेरी बेटी की पढ़ाई को नज़रअंदाज़ न करें, और मेरी बेटी की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दें. लड़कियों की पढ़ाई में मदद के लिए जितना हो सके उतनी मदद करें.
रोहिदास हातागले