'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की अनूठी और साहसी मिसाल पेश करने वाली महाराष्ट्र के बीड की रमाबाई रणवीर के संघर्ष को अब देश की सर्वोच्च अदालत ने भी सलाम किया है. अपनी बेटियों की शिक्षा का खर्च उठाने के लिए एक निजी संस्था द्वारा आयोजित 3 किलोमीटर की मैराथन दौड़ में हिस्सा लेकर 3,000 रुपये का पहला इनाम जीतने वाली इस मां की जिद्द और जज्बे की खबर जब देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत इसका संज्ञान लिया.
CJI ने मामले का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के अधिकारियों को रमाबाई के बारे में जानकारी जुटाने और उनकी मदद के निर्देश दिए. इस पर NALSA और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बीड के अधिकारियों ने ज्ञानदीप एकेडमी पहुंचकर रमाबाई से मुलाकात की और उनकी स्थिति की विस्तृत जानकारी ली.
दरअसल, रमाबाई बीड जिले की अंबाजोगाई तहसील के लोखंडी सावरगांव स्थित ज्ञानदीप अकादमी में रहती हैं. उनके पति की साल 2012 में मौत हो गई थी. रमाबाई के मुताबिक, पति की मौत की परिस्थितियां आज भी स्पष्ट नहीं हैं और उन्हें उनका मृत्यु प्रमाण पत्र तक नहीं मिल पाया है. इसी वजह से उनकी छोटी बेटी आरती को पढ़ाई के लिए मिलने वाली छात्रवृत्ति में भी परेशानी आ रही है.
CJI के निर्देश पर अधिकारियों ने ली जानकारी
बीड जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. वहाब ई. सैयद ने बताया कि रमाबाई की कहानी सामने आने के बाद सीजेआई सूर्यकांत ने NALSA के सदस्य सचिव को उनके बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए कहा. इसके बाद विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों ने रमाबाई से मुलाकात की और उनके परिवार, आर्थिक स्थिति और बेटियों की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली.
उन्होंने बताया कि रमाबाई मूल रूप से हिंगोली जिले के पोथरा गांव की रहने वाली हैं. गांव में उन्हें घरकुल योजना के तहत मकान मिला था, लेकिन उसकी हालत खराब है. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस संबंध में प्रशासन और सरपंच से संपर्क किया है. एसडीएम और गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर यह पता लगाया जा रहा है कि रमाबाई को सरकारी योजनाओं का कौन-कौन सा लाभ दिलाया जा सकता है.
कई संस्थाएं मदद के लिए आगे आईं
रमाबाई की कहानी सामने आने के बाद कई संस्थाओं और लोगों ने मदद का हाथ बढ़ाया है. राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की ओर से एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई है. वहीं, सचिन तेंदुलकर की ओर से परिवार को करीब 15 हजार रुपये की कीमत के चार जोड़ी खेल के जूते भेजे गए हैं.
आवादा फाउंडेशन ने रमाबाई को 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी है. संस्था ने उनकी दोनों बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाने का भी भरोसा दिया है. बीड जिला प्रशासन की ओर से भी परिवार को आर्थिक सहायता, किताबें और कपड़े उपलब्ध कराए गए हैं.
बेटियों के भविष्य के लिए मां ने लगाई दौड़
रमाबाई का कहना है कि उन्होंने यह दौड़ पुरस्कार जीतने के लिए नहीं, बल्कि अपनी बेटियों की पढ़ाई के लिए लगाई थी. उनका कहना है कि उनके पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. बेटियों की फीस और पढ़ाई का खर्च जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती है.
रमाबाई ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी बात दिल्ली तक पहुंची और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उनकी परेशानी को समझा. उन्होंने उम्मीद जताई कि अब उनके पति का मृत्यु प्रमाण पत्र मिल सकेगा, जिससे उनकी बेटी की छात्रवृत्ति का रास्ता साफ होगा.
ज्ञानदीप अकादमी के चेयरमैन दत्ता दराडे ने बताया कि CJI के संज्ञान लेने के बाद अधिकारियों ने परिवार के बारे में जानकारी जुटाई. कलमनुरी के उप जिलाधिकारी, तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से भी संपर्क किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर पर परिवार को हरसंभव मदद दिलाने की कोशिश की जा रही है.
रोहिदास हातागले