पुणे में MPSC ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा पेपर लीक मामले में नया मोड़ सामने आया है. जांच में अब एक कथित प्रेम संबंध भी चर्चा में है. बताया जा रहा है कि इसी रिश्ते में आई दरार के बाद पेपर लीक की शिकायत सामने आई.
दरअसल, एक महिला अभ्यर्थी को 22 मार्च 2026 को होने वाली स्क्रीनिंग परीक्षा से दो दिन पहले प्रश्नपत्र मिल गया था. आरोप है कि उसके पिता ने पेपर हासिल करने के लिए बिचौलिए प्रवीण पाटील को पांच लाख रुपये एडवांस दिए थे. प्रवीण पाटील नंदुरबार में कोचिंग क्लास चलाता है. महिला अभ्यर्थी उसी संस्थान में पढ़ाई कर रही थी.
जांच के मुताबिक, पेपर मिलने के बाद महिला अभ्यर्थी ने इसे अपने बॉयफ्रेंड गौरव पाटील के साथ शेयर किया. इसके बाद उसने एग्जाम दिया. वह ड्रग इंस्पेक्टर पोस्ट की सिलेक्शन प्रोसेस में आगे भी पहुंच गई.
इसके बाद में दोनों की रिलेशनशिप में विवाद हो गया. उनका ब्रेकअप हो गया. आरोप है कि इसके बाद ही गौरव ने MPSC से पेपर लीक की शिकायत की.
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मामले में इसके बाद एक और चौंकाने वाली बात सामने आई. गौरव ने बाद में ईमेल भेजकर दावा किया कि उसने पेपर लीक की शिकायत जानबूझकर गढ़ी थी. अब जांच एजेंसियां इन दोनों दावों की सच्चाई की जांच कर रही हैं.
जांच में एक कथित फोन कॉल भी सामने आया है. बताया जा रहा है कि परीक्षा के बाद महिला अभ्यर्थी ने कोचिंग संचालक को फोन किया था. उसने कथित तौर पर कहा था कि उसने 78 सवाल हल किए हैं. इनमें करीब 90 सवाल और उनके विकल्प कथित लीक पेपर से मिलते थे.
सूत्रों के अनुसार, उसने जानबूझकर कम सवाल हल किए. उसका मकसद किसी तरह का शक पैदा होने से बचना था. मामले को आगे बढ़ाने में एक सोशल मीडिया वीडियो की भी भूमिका बताई जा रही है. गौरव ने एक अन्य अभ्यर्थी गंगुर्डे का वीडियो देखा था.
गंगुर्डे ने MPSC की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे. उन्होंने बिना नंबर बताए कैटेगरी वाइज लिस्ट जारी करने पर सवाल किया था. उन्होंने यह भी पूछा था कि अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए किस आधार पर बुलाया गया. वीडियो देखने के बाद गौरव ने गंगुर्डे से संपर्क किया. दोनों की मुलाकात भी हुई. इसके बाद मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा.
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गौरव गिरफ्तार, महिला को नोटिस
मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस मामले में गौरव पाटील को गिरफ्तार किया है. महिला अभ्यर्थी को नोटिस दिया गया है. अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है. मामले की जांच जारी है. एजेंसी पेपर लीक की पूरी कड़ी का पता लगाने में जुटी है. इसमें अभ्यर्थी, बिचौलियों और MPSC से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है.
विवाद के बीच MPSC ने ड्रग इंस्पेक्टर पद की पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी है. यह भर्ती खाद्य एवं औषधि प्रशासन के तहत ग्रुप-B पदों के लिए थी. 22 मार्च की स्क्रीनिंग परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं. इसके बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने प्रारंभिक जांच की.
आयोग के अनुसार, जांच में पहली नजर में यह सामने आया कि एक अभ्यर्थी को प्रश्नपत्र मिला था. उसे इसका फायदा भी मिला. अब इस पद के लिए दोबारा पेपर होगा. पहले अप्लाई कर चुके अभ्यर्थियों को नया अप्लाई नहीं करना होगा. उनसे दोबारा परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा. नई परीक्षा की तारीख बाद में घोषित की जाएगी.
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ड्रग इंस्पेक्टर की स्क्रीनिंग परीक्षा ऑफलाइन हुई थी. ये एग्जाम 22 मार्च को महाराष्ट्र के छह संभागीय मुख्यालयों में आयोजित की गई थी. इसका रिजल्ट 12 जून को घोषित हुआ था. उस समय 506 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए योग्य पाया गया था.
इनमें से 488 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू 1 जुलाई से 22 जुलाई के बीच हुए. इंटरव्यू पूरे होने के बाद आयोग ने 488 अभ्यर्थियों की अस्थायी मेरिट लिस्ट जारी की. इस सूची में 485 अभ्यर्थी योग्य थे. तीन अभ्यर्थियों को अयोग्य बताया गया था.
पेपर लीक मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें MPSC के अतिरिक्त सचिव अभिजीत लेंदवे भी शामिल हैं. इसके अलावा MPSC से जुड़े तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी की भी जानकारी सामने आई है. मामले की जांच अभी चल रही है. जांच के दौरान पेपर लीक की पूरी साजिश और इसमें शामिल लोगों की भूमिका सामने आने की उम्मीद है.
ओमकार