मुंबई-गोवा नेशनल हाईवे (NH-66) की हालत एक बार फिर से खराब हो गई है. इस प्रोजेक्ट को शुरू हुए 14 साल बीत चुके हैं. इस पर 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं. इसके बावजूद पहली ही मानसून की बारिश में इस हाईवे पर गड्ढे उभर आए हैं. नए बनाए गए सीमेंट-कंक्रीट के रास्ते भी खराब होने लगे हैं.
इस 440 किलोमीटर लंबे हाईवे पर अभी भी कई जगह रास्ते बदले हुए हैं, पानी भर रहा है और गाड़ियां जाम में फंस रही हैं. इसके बाद भी मई के बीच में पनवेल और पेन के बीच खरपाड़ा टोल प्लाजा पर टोल वसूलना शुरू कर दिया गया है.
पहले चरण का टोल 100 रुपये तय किया गया है. इससे लोगों में भारी गुस्सा है. जनता का कहना है कि अभी कई जगहों पर चौड़ीकरण, पुल और बाईपास का काम अधूरा पड़ा है. ऐसे में टोल वसूलना गलत है. गुस्से में आकर कई स्थानीय लोग टोल बचाने के लिए सर्विस रोड का इस्तेमाल कर रहे हैं.
नई सड़कों में भी हुए बड़े-बड़े गड्ढे
लोगों का कहना है कि सड़क के काम की क्वालिटी बहुत खराब है. डामर और सीमेंट-कंक्रीट से बनाई गई नई सड़कों पर भी बारिश के बाद बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं. कई जगहों पर मरम्मत का काम चल रहा है, जिससे ट्रैफिक और ज्यादा धीमा हो गया है.
तारा गांव के पास एक पुल पर मरम्मत का काम चल रहा है, जिसकी वजह से लंबा जाम लग रहा है. एक स्थानीय निवासी विश्वजीत पाटिल ने बताया, 'हम 100 रुपये टोल दे रहे हैं, लेकिन हमें बदले में क्या मिल रहा है? वही गड्ढों से भरी सड़क. मरम्मत के काम से सिर्फ जाम बढ़ता है. दो दिन पहले मैं ट्रैफिक की वजह से काम पर दो घंटे लेट पहुंचा था.'
इसके अलावा, कई जगहों पर रिटेनिंग वॉल बह गई हैं और पानी की निकासी का भी सही इंतजाम नहीं है. रोड सेफ्टी एक्टिविस्ट चैतन्य पाटिल ने सवाल उठाया है कि जब सड़क का काम पूरा नहीं हुआ है और नई कंक्रीट सड़क पर भी गड्ढे हो रहे हैं, तो टोल वसूलना कहां तक सही है?
बंदरों के लिए बनाया गया मंकी ब्रिज भी ढहा
हादसों और सुरक्षा को लेकर एक और बड़ी समस्या सामने आई है. कन्नाला एनिमल सैंचुरी के पास वन्यजीवों (बंदरों) के लिए बनाया गया ओवरपास (मंकी ब्रिज) ढह गया है.
इस पुल को साल 2021 में बनाया गया था ताकि बंदर हाईवे को सुरक्षित पार कर सकें. लेकिन अब इसके खराब होने से बंदर जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने को मजबूर हैं. यह इलाका सड़क हादसों के लिहाज से बहुत खतरनाक माना जाता है,
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पुल के गिरने से वाहन चालकों और जानवरों दोनों की जान को बड़ा खतरा पैदा हो गया है. पिछले साल एक बाइक राइडर की मौत सिर्फ इसलिए हो गई थी क्योंकि वह एक बंदर को बचा रहा था. इस तरह के हादसे अब और बढ़ सकते हैं. हालांकि, इस पूरे मामले पर एनएचएआई (NHAI) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रविंद्र इंगोले की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
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मुस्तफा शेख