विधायक क्या हाई कोर्ट से ऊपर हैं? बॉम्बे HC ने नगर निगम को लगाई फटकार, आदेश के बावजूद जारी किए थे स्टॉप वर्क नोटिस

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मीरा भयंदर नगर निगम के अधिकारियों को फटकार लगाई है. दरअसल, भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता के पत्र के बाद नगर निगम ने स्टॉप वर्क नोटिस जारी किए. कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि क्या विधायक हाईकोर्ट से ऊपर है. कोर्ट के आदेश की अनदेखी क्यों की गई.

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 राज्य सरकार को कोर्ट ने महिला अधिकारी को 25 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है. (फाइल फोटो-ITG) राज्य सरकार को कोर्ट ने महिला अधिकारी को 25 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है. (फाइल फोटो-ITG)

विद्या

  • मुंबई,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:25 PM IST

महाराष्ट्र के मुंबई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मीरा भयंदर नगर निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या किसी विधायक का आदेश हाईकोर्ट से ऊपर है. 

कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये पर हैरानी भी जताई. मामला BJP विधायक नरेंद्र मेहता के एक पत्र से जुड़ा है.

मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र वी ग्हुगे और जस्टिस गौतम ए अंखड की बेंच ने की. बेंच ने मीरा भयंदर नगर निगम के कमिश्नर और टाउन प्लानिंग अधिकारी के काम पर सवाल उठाए. दरअसल, अधिकारियों ने एक डेवलपर के प्रोजेक्ट पर कई बार स्टॉप वर्क नोटिस जारी किए थे.

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कोर्ट के आदेश के बावजूद जारी हुए नोटिस

मामला ग्रैंडबिल्ड लैंड डेवलपर्स LLP से जुड़ा है. दरअसल, कंपनी भयंदर में 33 मंजिला रिहायशी प्रोजेक्ट बना रही है. इसके साथ एक प्राइमरी स्कूल भी बनाया जाना है.

नगर निगम ने कंपनी को स्टॉप वर्क नोटिस जारी किए थे. इसके बाद डेवलपर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 27 अप्रैल को हाईकोर्ट की एक बेंच ने निगम की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने साफ कहा था कि कंपनी के खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाए.

इसके बावजूद निगम ने मई और जून में फिर स्टॉप वर्क नोटिस जारी कर दिए. इन नोटिस के पीछे BJP विधायक नरेंद्र मेहता के पत्र का हवाला दिया गया. विधायक ने प्रोजेक्ट के प्लान में बदलाव की मांग की थी.

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कोर्ट ने पूछा-MLA हाईकोर्ट से ऊपर है क्या?

मामले की सुनवाई के दौरान बेंच ने अधिकारियों से कड़ा सवाल किया. कोर्ट ने पूछा कि क्या उनके लिए विधायक हाईकोर्ट से ऊपर है. कोर्ट ने यह भी पूछा कि हाईकोर्ट की बेंच के आदेश की अनदेखी करके विधायक के पत्र पर कार्रवाई क्यों की गई.

बेंच ने अधिकारियों के व्यवहार पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि उनके इस रवैये से वह हैरान है. शुरुआत में कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी भी दी. बेंच ने पुराने एक मामले का उदाहरण दिया. इसमें कर्नाटक के मुख्य सचिव को अवमानना के मामले में जेल भेजा गया था.

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नगर निगम कमिश्नर ने मांगी माफी

हालांकि बाद में कोर्ट ने फिलहाल कड़ी अवमानना कार्रवाई नहीं की. निगम कमिश्नर शर्मा ने कोर्ट में माफी मांगी. उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं थी.

डेवलपर की ओर से वरिष्ठ वकील बीरेंद्र सराफ ने भी कोर्ट से साधारण शो-कॉज नोटिस जारी करने का अनुरोध किया. उन्होंने कमिश्नर की माफी को देखते हुए यह मांग की. कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया.

बेंच ने फिलहाल अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने कमिश्नर शर्मा को माफी का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी.

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MahaRERA ने भी प्रोजेक्ट पर रोक लगाई

निगम की कार्रवाई का असर प्रोजेक्ट पर भी पड़ा. स्टॉप वर्क नोटिस के बाद MahaRERA ने 21 जुलाई को प्रोजेक्ट के खाते फ्रीज कर दिए. साथ ही बिक्री के रजिस्ट्रेशन पर भी रोक लगा दी गई.

अब हाईकोर्ट की फटकार के बाद निगम ने सभी स्टॉप वर्क से जुड़े पत्र वापस लेने का भरोसा दिया है. निगम इन्हें MahaRERA को भी भेजेगा.

कोर्ट ने अधिकारियों से अपने आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा है. अब मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी. तब तक निगम को अपनी कार्रवाई और माफी से जुड़े दस्तावेज कोर्ट में पेश करने होंगे.

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