सड़कें बनीं नदी, कॉलोनियां टापू... मुंबई में बारिश का कहर, कहीं बिजली गुल तो कहीं 3 फीट पानी में डूबा रास्ता

महाराष्ट्र में हो रही मूसलाधार बारिश ने मुंबई महानगर इलाके समेत पालघर, ठाणे, वसई, नालासोपारा और भिवंडी में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गई हैं, कॉलोनियां चारों ओर से पानी में घिर गई हैं और लोगों को घरों से निकलने तक में दिक्कत हो रही है. वसई की एक बस्ती में पिछले 24 घंटे से बिजली आपूर्ति ठप है, जबकि मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ के लिए रेड अलर्ट जारी किया है.

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कहीं 24 घंटे से बिजली गुल तो कहीं 3 फीट पानी में डूबा रास्ता. (Photo: Screengrab) कहीं 24 घंटे से बिजली गुल तो कहीं 3 फीट पानी में डूबा रास्ता. (Photo: Screengrab)

दीपेश त्रिपाठी

  • मुंबई,
  • 04 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:31 PM IST

महाराष्ट्र में मानसून ने एक बार फिर अपनी पूरी ताकत दिखानी शुरू कर दी है. मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) से लेकर ठाणे, पालघर, वसई, नालासोपारा और भिवंडी तक लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गई हैं, कॉलोनियां चारों तरफ से घिर गई हैं और लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है.

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इसी बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. विभाग ने अगले कुछ घंटों तक कई जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी दी है. पालघर जिले के नालासोपारा फाटा इलाके में लोग भारी मुसीबत का सामना कर रहे हैं. यहां हाइवे के नजदीक स्थित इस इलाके में लगातार बारिश के कारण घुटनों से ऊपर तक पानी भर गया है. हालात ऐसे हैं कि वाहन रेंगते हुए निकल रहे हैं.

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कई दोपहिया चालकों को बीच रास्ते वाहन रोकने पड़े. पैदल निकलने वाले लोगों को भी पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से हर तेज बारिश के बाद यही हाल हो जाता है.

सातिवली रोड: हाइवे से जोड़ने वाला अहम रास्ता भी डूबा

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वसई पूर्व की सातिवली रोड हाइवे को कनेक्ट करने वाला प्रमुख रास्ता है, वहां भी भारी जलभराव हो गया है. सड़क के दोनों किनारों पर पानी भर जाने से ट्रैफिक प्रभावित हुआ है. रोजाना हजारों लोग इसी रास्ते से सफर करते हैं, लेकिन बारिश ने इस अहम सड़क की रफ्तार थाम दी है. स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल जलनिकासी की मांग की है.

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इसके अलावा बेहद मुश्किल हालात वसई पूर्व की मिठागर वसाहत में देखने को मिले हैं. लगातार बारिश के कारण पूरी कॉलोनी पानी से घिर गई है. मुख्य सड़क पूरी तरह पानी में डूब चुकी है. इससे करीब 120 परिवारों के 300 से 400 लोग प्रभावित हुए हैं. मुसीबत सिर्फ पानी तक सीमित नहीं है.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 24 घंटों से बिजली आपूर्ति ठप है. अंधेरे, जलभराव और जरूरी सुविधाओं के अभाव में परेशानी कई गुना बढ़ गई है.

यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि हर साल बारिश में यही स्थिति हो जाती है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया. उनका आरोप है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद अब तक कोई प्रशासनिक टीम राहत पहुंचाने नहीं आई.

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चंदनसार कोपरी गांव: तीन फीट पानी में डूब गया रास्ता

वसई के चंदनसार कोपरी गांव का मुख्य संपर्क मार्ग भी पानी में समा गया है. करीब तीन फीट तक पानी भर जाने से सुबह काम पर निकलने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पहाड़ी इलाकों से आ रहे पानी के कारण जलस्तर लगातार बढ़ता रहा. लोगों को जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से गुजरना पड़ा. कई वाहन रास्ते में बंद हो गए, जिससे ट्रैफिक प्रभावित हुआ. स्थानीय लोगों ने सवाल करते हुए कहा कि आखिर हर साल बनने वाले ऐसे हालात से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन की तैयारियां कहां हैं.

भिवंडी का भाजी मार्केट भी पानी-पानी

ठाणे जिले में भिवंडी के तीन बत्ती भाजी मार्केट की तस्वीरें भी कम डराने वाली नहीं हैं. सुबह जब लोग सब्जियां खरीदने पहुंचे, तो बाजार की जगह पानी नजर आया. दर्जनों दुकानों में पानी घुस गया. व्यापारियों को नुकसान की आशंका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बारिश इसी तरह जारी रही तो शहर के और भी इलाके जलमग्न हो सकते हैं.

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भारतीय मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. विभाग के मुताबिक, अगले कुछ घंटों तक कई इलाकों में तेज से अत्यंत तेज बारिश हो सकती है. लोगों से अपील की गई है कि जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचें, अनावश्यक यात्रा न करें और प्रशासन की ओर से जारी सलाह का पालन करें.

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लोगों का कहना है कि बारिश नई नहीं है. मानसून भी हर साल आता है, लेकिन सवाल यह है कि जिन इलाकों में हर बरसात में सड़कें डूब जाती हैं, कॉलोनियां पानी में घिर जाती हैं और बिजली घंटों-घंटों गायब रहती है, वहां स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हो पाया? फिलहाल महाराष्ट्र के कई हिस्सों में लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि जलभराव की इस परेशानी का कोई स्थायी हल निकलेगा?

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(प्रवीण नलावडे और दीपेश के इनपुट के साथ)

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