तुकाराम मुंढे के फैसले पर महाराष्ट्र सरकार ने लगाया ब्रेक, CM फडणवीस ने तेल कारोबारियों को साल भर की दी छूट

तुकाराम मुंढे के एक्शन पर महाराष्ट्र सरकार ने ब्रेक लगा दिया है. महाराष्ट्र सरकार ने खुले खाद्य तेल बेचने वाले कारोबारियों को एक साल की राहत दी है. मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि FDA की सख्त कार्रवाई फिलहाल एक साल के लिए टाल दी गई है, लेकिन इसके बाद कानून का पालन अनिवार्य होगा. FDA ने मिलावट की आशंका के चलते खुले तेल को असुरक्षित बताया था.

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महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल की बिक्री पर FDA की कार्रवाई एक साल के लिए टाल दी गई है (Photo: PTI) महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल की बिक्री पर FDA की कार्रवाई एक साल के लिए टाल दी गई है (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:27 AM IST

महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल के कारोबारियों को FDA की कार्रवाई से एक साल की राहत मिली है. एफडीए चीफ तुकाराम मुंढे के फैसले को महाराष्ट्र सरकार ने बदल दिया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) के आदेश को एक साल के लिए रोक दिया जाएगा. हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि इस अवधि के बाद कोई और छूट नहीं दी जाएगी और कानून का पालन करना अनिवार्य होगा.

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पिछले महीने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने लोगों से खुला या बिना पैकिंग वाला खाद्य तेल न खरीदने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि यह असुरक्षित है और मिलावट जैसी गड़बड़ियों के चलते इस कारोबार के लिए एक अनुपालन आदेश जारी किया गया है. इसके बाद फडणवीस ने कहा था कि राज्य सरकार सख्त गुणवत्ता नियमों और परंपरागत तेल विक्रेताओं तथा छोटे उपभोक्ताओं की आजीविका के बीच बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है.

मंगलवार को फडणवीस ने मंत्रालय में खुले खाद्य तेल कारोबारियों की एक बैठक भी की, जिसमें उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, FDA मंत्री नरहरि झिरवाल और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. फडणवीस ने कहा कि गांवों में आज भी खुले तेल की मांग और जरूरत बनी हुई है, वहीं कई कारोबारियों की रोजी-रोटी भी इसी व्यापार से चलती है, इसलिए कानून और आम लोगों की जरूरतों में संतुलन बनाना जरूरी है.

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बदलाव लागू कराने के लिए दो समितियां बनाई जाएंगी. एक समिति परंपरागत तरीके से काम कर रहे कारोबारियों की दिक्कतें समझेगी और उन्हें कानून के मुताबिक बदलाव करने में मदद देगी. दूसरी समिति तेल विक्रेताओं, निर्माताओं और रिपैकेजिंग कारोबारियों के लिए जरूरी सुविधाएं तैयार करने के सुझाव देगी. दोनों समितियों को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी. सरकार गुणवत्ता जांच प्रणाली, पैकेजिंग सुविधा और जरूरत पड़ने पर अनुदान या सब्सिडी देकर भी कारोबारियों की मदद करेगी.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने खाद्य तेल में मिलावट रोकने के लिए 2011 में कानूनी प्रावधान लागू किए थे और 28 अगस्त 2020 तक इस पर चार अधिसूचनाएं जारी की जा चुकी हैं. राज्य में फिलहाल 2103 लाइसेंसधारी खुले खाद्य तेल कारोबारी हैं, जिनमें से 370 रिपैकेजिंग के बाद तेल बेचने का लाइसेंस रखते हैं और 489 तेल उत्पादन का लाइसेंस रखते हैं.

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