महाराष्ट्र में खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा को लेकर FDA (Food and Drug Administration) ने सख्त कार्रवाई की है. मुंबई के दो होटलों समेत अकोला में Blinkit के एक सेंटर का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया है. जांच में साफ-सफाई, खाद्य सामग्री रखने के तरीके, कर्मचारियों की स्वच्छता समेत कई नियमों की अनदेखी मिली. इसी कार्रवाई के दौरान सांगली में सुरक्षित तरीके से नहीं रखा गया 165 लीटर दूध जब्त कर मौके पर ही फेंक दिया गया.
अकोला में ब्लिंक कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड (Blinkit) के स्टोर पर जांच टीम पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद खराब था. फ्रीजर के प्लास्टिक पर्दे फटे हुए थे. खाने-पीने की चीजों को गैर-खाद्य सामान के साथ एक ही रैक पर ठूंसकर रखा गया था. कई सामान तो सीधे जमीन पर धूल-कचरे के बीच पड़े मिले. विभाग ने 12 अगस्त को सुधार की चेतावनी दी थी, लेकिन जब कोई बदलाव नहीं दिखा, तो 31 अगस्त को इसका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया.
मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित 'दिल्ली स्वीट एंड भेलपुरी हाउस' के फ्रीजर में खाने के सामान के साथ कच्चे अंडे रखे मिले. जांच में खाना बनाने के लिए दूषित पानी के इस्तेमाल की बात भी सामने आई. रसोई की दीवारों पर सीलन और गंदगी मिली. वहीं, कुर्ला वेस्ट के 'गुलजार मोहम्मदी होटल' की हालत भी खराब मिली. स्वच्छता जांच में होटल को 100 में सिर्फ 24 अंक मिले. रसोई की दीवारों पर तेल की मोटी परत जमी थी, नालियां गंदी थीं. कर्मचारियों ने ग्लव्स और हेडगेयर नहीं पहन रखे थे. इन खामियों के बाद दोनों जगहों के लाइसेंस तत्काल सस्पेंड कर दिए गए.
सांगली में खुले में रखा 165 लीटर दूध नष्ट
सांगली के मिरज में 'मयाक्का मिल्क कलेक्शन सेंटर' पर भी बड़ी धांधली पकड़ी गई. यहां 120 लीटर गाय का और 43 लीटर भैंस का दूध बिना किसी कूलिंग के चार घंटे से ज्यादा समय तक साधारण कमरे में रखा था. दूध का कोई हिसाब-किताब भी रजिस्टर में दर्ज नहीं था. हद तो तब हो गई जब पहले से सील की गई क्रीम निकालने वाली मशीन की सरकारी सील भी टूटी मिली. टीम ने इस 165 लीटर दूध को जनता की सेहत के लिए जहर मानते हुए तुरंत नष्ट करा दिया.
FDA ने साफ किया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी है. जांच में सामने आई कमियों के आधार पर तीन जगहों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं. सांगली में सुरक्षित तरीके से नहीं रखा गया दूध भी लोगों के इस्तेमाल में न आए, इसलिए उसे मौके पर ही फेंक दिया गया.
दीपेश त्रिपाठी