डॉक्टर से मारपीट करने वाले शिवसेना पार्षद को HC से झटका, नरमी बरतने की मांग वाली याचिका खारिज

बॉम्बे हाईकोर्ट ने डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की उम्र और मेडिकल स्थिति के आधार पर नरमी की मांग को अस्वीकार कर दिया.

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की शिवसेना पार्षद की याचिका. (File photo) बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की शिवसेना पार्षद की याचिका. (File photo)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:11 AM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट के मामले में शिव सेना पार्षद रमेश म्हात्रे की उस अपील को मानने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी उम्र और मेडिकल स्थिति के आधार पर नरमी बरतने की मांग की थी. कोर्ट ने टिप्पणी की कि डॉक्टरों पर कथित हमले के दौरान वह 25 साल के युवा से भी ज़्यादा ऊर्जावान लग रहे थे.

एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र वी घुगे और जस्टिस गौतम ए अनखड की पीठ ने कल्याण सत्र न्यायालय द्वारा म्हात्रे को दी गई जमानत पर रोक बढ़ा दी और मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय की. 6 जुलाई को कल्याण डोम्बिवली नगर निगम (KDMC) द्वारा संचालित अस्पताल में हुई मारपीट की घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया था.

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मारपीट के वक्त युवा की थे ऊर्जावान

म्हात्रे की ओर से पेश वकील सना रईस खान ने दलील दी कि 73 वर्षीय कॉर्पोरेटर कई बीमारियों से पीड़ित हैं और उनकी केवल एक किडनी काम कर रही है. उन्होंने तर्क दिया कि वह एक गर्भवती महिला की मेडिकल इमरजेंसी में मदद करने गए थे. इस पर पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब वो डॉक्टर पर हमला कर रहे थे, तब वह 25 साल के युवा से भी ज्यादा ऊर्जावान दिख रहे थे.

सफेद कोट न पहनने से हुए भ्रम

म्हात्रे के बचाव पक्ष ने दावा किया कि 9 महीने की गर्भवती महिला को तीन घंटे तक इलाज के बिना रखा गया था और रेड अलर्ट के बावजूद मुंबई के सायन अस्पताल भेजने की सलाह दी गई थी. म्हात्रे महिला के रिश्तेदारों के बुलाने पर वहां पहुंचे थे और डॉक्टरों से केवल इलाज करने का अनुरोध किया था. बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और सफेद कोट न पहनने के कारण पहचान में भ्रम पैदा हुआ.

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आईएमए की याचिका मंजूर

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की हस्तक्षेप याचिका को भी मंजूरी दे दी है. आईएमए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू कामदार ने कहा कि एसोसिएशन कथिततौर पर मारपीट का शिकार हुए तीन डॉक्टरों के साथ खड़ा है और केंद्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार 6 घंटे के अंदर संस्थागत FIR दर्ज की जानी चाहिए थी.

बेंच ने महाराष्ट्र सरकार को ये भी निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई के दौरान संभावित जांच के लिए ठाणे सिविल अस्पताल के 8-10 जुलाई और 13-15 जुलाई के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखे और तैयार रखे. इसने KDMC द्वारा संचालित शास्त्री नगर अस्पताल को 6 जुलाई को शाम 7 बजे से रात 10 बजे के बीच हुई कथित मारपीट के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया. कोर्ट ने ये भी सवाल किया कि क्या पुलिस हिरासत के दौरान म्हात्रे को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था.

एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने बताया कि म्हात्रे का ब्लड प्रेशर 160 तक बढ़ गया था और वो पुलिस के सामने गिर पड़े थे. मजिस्ट्रेट द्वारा वीसी से इनकार के बाद उन्हें शारीरिक रूप से पेश किया गया था ताकि कोई मेडिकल जोखिम न रहे.

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6 जुलाई को हुई थी घटना

दरअसल, ये पूरी घटना 6 जुलाई की है जब शास्त्री नगर अस्पताल में एनआईसीयू बेड की कमी के कारण डॉक्टरों ने नवजात के परिवार को दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी. वायरल फुटेज में म्हात्रे को मेडिकल ऑफिसर डॉ. वैभव सालुंखे को थप्पड़ व मुक्के मारते और डॉ. सृष्टि बाविस्कर को पीटते देखा गया था. इस हमले से आहत होकर दोनों डॉक्टरों ने मानसिक आघात का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था.

म्हात्रे को 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था और कल्याण कोर्ट ने 50,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी थी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस जमानत आदेश को 'विकृत' बताते हुए म्हात्रे और चार अन्य सह-आरोपियों की जमानत रद्द कर दी थी और पुलिस के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया था. म्हात्रे ने सरेंडर कर दिया है और वो 3 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि पुलिस ने 5वीं आरोपी साधना करंडे को भी गिरफ्तार कर लिया है.

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