गणेश विसर्जन के बाद BMC का एक्शन, इको-फ्रेंडली तरीके से हटाई 2754 MT सामग्री

गणेश उत्सव 2026 के दौरान बीएमसी ने 16 से 27 सितंबर के बीच 707 वाहन ट्रिप के जरिए 2,754.85 मीट्रिक टन विसर्जित मूर्ति सामग्री हटाई. 26 सितंबर को सबसे ज्यादा 510.92 मीट्रिक टन सामग्री हटाई गई. पीओपी सामग्री को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से स्टोर कर रिसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल की प्रक्रिया के लिए भेजा जा रहा है.

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गणेश उत्सव के बाद बीएमसी ने 2,754.85 मीट्रिक टन मूर्ति सामग्री हटाई.(Photo-PTI) गणेश उत्सव के बाद बीएमसी ने 2,754.85 मीट्रिक टन मूर्ति सामग्री हटाई.(Photo-PTI)

मुस्तफा शेख

  • मुंबई,
  • 27 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST

गणेश उत्सव 2026 के दौरान बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने विसर्जन के बाद मूर्तियों और अन्य सामग्री के रूप में जमा 2,754.85 मीट्रिक टन सामग्री हटाई. बीएमसी ने 16 से 27 सितंबर 2026 के बीच 707 वाहन ट्रिप के जरिए इस सामग्री को ट्रांसपोर्ट किया.

सबसे ज्यादा सामग्री 26 सितंबर को हटाई गई, जब 131 ट्रिप के जरिए 510.92 मीट्रिक टन सामग्री का परिवहन किया गया. वार्डों में के/वेस्ट से सबसे ज्यादा 314.82 मीट्रिक टन सामग्री हटाई गई. इसके बाद एस वार्ड से 253.58 मीट्रिक टन और डी वार्ड से 249.43 मीट्रिक टन सामग्री हटाई गई.

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यह अभियान बॉम्बे हाई कोर्ट के लागू निर्देशों और सीपीसीबी की एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशों के तहत किया गया. इन निर्देशों के अनुसार, निर्धारित आर्टिफिशियल इमर्शन पोंड में जमा सामग्री को हटाकर पर्यावरण के अनुकूल तरीके से तब तक स्टोर किया जाना है, जब तक इसे रीजेनेरेशन, रिसाइक्लिंग या दोबारा इस्तेमाल के लिए नहीं लिया जाता.

ऐसे तैयार की गई रिपोर्ट

बीएमसी ने मूर्तियों और सामग्री को हटाने, ट्रांसपोर्ट, डॉक्यूमेंटेशन और अस्थायी स्टोरेज के लिए शहरभर में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी की थी. वार्ड स्तर की टीमों ने विसर्जित मूर्तियों को हटाने का काम किया, जबकि ट्रांसपोर्ट के लिए साफ और ढके हुए वाहनों का इस्तेमाल किया गया. हर वाहन के वजन को वेब्रिज पर रिकॉर्ड किया गया और वार्ड के हिसाब से रिकॉर्ड, तस्वीरें और रोजाना की प्रोग्रेस रिपोर्ट तैयार की गई.

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पीओपी पारंपरिक मिट्टी की तरह प्राकृतिक रूप से नहीं घुलता. अगर विसर्जन के बाद की सामग्री को आर्टिफिशियल पोंड में छोड़ दिया जाए या प्राकृतिक जलस्रोतों में जाने दिया जाए, तो इससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और विसर्जन पोंड के दोबारा इस्तेमाल में बाधा आ सकती है. इसके बाद यह सामग्री जलस्रोतों और समुद्र तटों पर अवशेष के रूप में भी दिखाई दे सकती है. इसलिए समय पर सामग्री को हटाना विसर्जन के बाद की पर्यावरणीय जिम्मेदारी का जरूरी हिस्सा है.

धार्मिक भावनाओं का सम्मान

विसर्जन के बाद पीओपी की मूर्तियां गीली और कमजोर हो जाती हैं और उन्हें हटाने, लोड करने, ट्रांसपोर्ट करने और उतारने के दौरान आंशिक रूप से टूट सकती हैं. बड़ी मात्रा में सामग्री होने के कारण इसे हटाने के लिए मैकेनिकल सहायता जरूरी है. मुलुंड स्थित निर्धारित अस्थायी स्टोरेज फैसिलिटी में जमा सामग्री को वैज्ञानिक रिसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल किए जाने तक एकत्र किया जा रहा है. बीएमसी ने उपयुक्त और पर्यावरण के अनुकूल रिसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी की पहचान के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट भी आमंत्रित किया है. बीएमसी ने कहा कि वह धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के साथ-साथ अपनी कानूनी और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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