झारखंड के रामगढ़ जिले में रिश्वतखोरी के मामले में रेलवे के 2 अधिकारियों को अदालत ने तीन-तीन साल की सजा सुनाई है. दोनों अधिकारियों ने सीबीआई की टीम को देखते ही रिश्वत के नोट फर्श पर फेंक दिए और खुद को बचाने के लिए पैसे लेने से इनकार कर दिया. लेकिन फोरेंसिक जांच और गवाहों के बयानों ने उनकी पूरी कहानी की पोल खोल दी.
यह मामला पूर्व मध्य रेलवे के पतरातू डीजल शेड का है और साल 2018 का है. ठेकेदार नरेश कुमार सिंह का करीब 6.26 लाख रुपये का बिल भुगतान के लिए लंबित था. आरोप है कि बिल पास करने के बदले सहायक सामग्री प्रबंधक कैलाश कांत झा ने 17 हजार रुपये और वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर राजेश्वरी सिंह ने 45 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी.
29 अगस्त का है मामला?
रिश्वत की मांग से परेशान ठेकेदार ने मामले की शिकायत सीबीआई से कर दी. इसके बाद एजेंसी ने दोनों अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया. 29 अगस्त 2018 को सीबीआई की टीम स्वतंत्र गवाहों के साथ पतरातू डीजल शेड पहुंची. योजना के मुताबिक ठेकेदार ने अधिकारियों को रिश्वत की रकम दी. रकम लेने के बाद जैसे ही सीबीआई टीम ने कमरे में पहुंचकर अपनी पहचान बताई, दोनों अधिकारियों के तेवर बदल गए.
आरोप है कि कैलाश कांत झा ने नोटों की गड्डी मेज के पीछे और फर्श पर फेंक दी. वहीं राजेश्वरी सिंह ने भी अपनी मेज पर रखे पैसे दूर धकेल दिए और रिश्वत लेने से साफ इनकार कर दिया. मामला अदालत पहुंचा तो बचाव पक्ष ने दलील दी कि अधिकारियों के पास से सीधे पैसे बरामद नहीं हुए, बल्कि नोट फर्श से मिले थे. इसलिए उन्हें फंसाने की साजिश हो सकती है. हालांकि सीबीआई ने फोरेंसिक सबूतों के जरिए इस दलील को कमजोर कर दिया.
रिश्वत लेने की ऐसे हुई पुष्टि
जांच के दौरान रिश्वत की रकम पर फिनोलफ्थलीन पाउडर लगाए जाने की बात सामने आई. अधिकारियों के हाथ और शर्ट की जेब को सोडियम कार्बोनेट के घोल से धोने पर पानी का रंग गुलाबी हो गया. कोलकाता की फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट ने भी अधिकारियों के रिश्वत की रकम के संपर्क में आने की पुष्टि की.
मामले में स्वतंत्र गवाहों ने भी अदालत में रकम के लेनदेन और सीबीआई के पहुंचते ही अधिकारियों द्वारा पैसे फेंके जाने की गवाही दी. कॉल डिटेल रिकॉर्ड, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों अधिकारियों को दोषी माना. रांची की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कैलाश कांत झा और राजेश्वरी सिंह को तीन-तीन साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई.
सत्यजीत कुमार