झारखंड की राजधानी रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन के 13वें दिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से ऑडियो कॉल के जरिए बातचीत की. यह वार्ता करीब तीन मिनट तक चली. इस दौरान आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र रविंद्र पासवान ने राहुल गांधी के सामने अपनी और अन्य प्रदर्शनकारियों की मांगें रखीं.
रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा के माध्यम से राहुल गांधी और छात्रों के बीच यह बातचीत कराई गई. राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों की बातें सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को उठाया जाएगा. उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए उनकी तरफ से हरसंभव प्रयास किया जाएगा.
यह भी पढ़ें: दिल ना दिया... गाना गाकर रांची प्रोटेस्ट को सपोर्ट करने पहुंचा वायरल 'धूम'
बातचीत के दौरान रविंद्र पासवान ने छात्र आंदोलन से जुड़ी परिस्थितियों और सरकार की भूमिका का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि अगर झारखंड सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता नहीं दिखा रही है तो कांग्रेस को सरकार पर दबाव बनाना चाहिए. उन्होंने राहुल गांधी से यहां तक कहा कि यदि सरकार उनकी बात नहीं मानती है तो कांग्रेस को गठबंधन से अलग होने पर विचार करना चाहिए.
छात्रों ने परीक्षा माफिया का मुद्दा उठाया
रविंद्र पासवान ने बातचीत के बाद बताया कि उन्होंने राहुल गांधी को रांची में आंदोलन की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि राज्य में परीक्षा माफिया के फलने-फूलने का मुद्दा भी उनके सामने रखा गया. पासवान के मुताबिक, उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि गठबंधन सरकार में कांग्रेस की भी जिम्मेदारी है, इसलिए पार्टी को छात्रों के पक्ष में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए.
उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने छात्रों से उनकी सभी मांगें WhatsApp पर भेजने को कहा है. राहुल गांधी ने कहा कि वह इन मांगों को गंभीरता से लेंगे और अपनी तरफ से जो संभव होगा, वह करेंगे. छात्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री से बात करने की बात भी राहुल गांधी की ओर से कही गई.
रविंद्र पासवान ने कहा कि छात्रों को सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए. उनका कहना है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती. उन्होंने कांग्रेस से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि वह सत्ता पक्ष के साथ है या छात्रों के साथ.
'मांग नहीं मानी तो गठबंधन तोड़ दीजिए'
प्रदर्शनकारी छात्र नेता ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस भी गठबंधन का हिस्सा है. इसलिए छात्रों के मुताबिक, जितनी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की है, उतनी ही कांग्रेस की भी है. उन्होंने राहुल गांधी से आग्रह किया कि अगर सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीर नहीं होती है तो कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए और छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए.
पासवान ने कहा कि छात्रों ने राहुल गांधी के सामने यह भी बात रखी कि सरकार अगर कांग्रेस की बात नहीं सुनती है तो गठबंधन में बने रहने का औचित्य क्या है. उन्होंने साफ कहा कि छात्र अपनी आवाज सत्ता पक्ष तक पहुंचाते रहेंगे और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तरफ से फिलहाल छात्रों को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन ही मिला है. हालांकि, प्रदर्शनकारी सिर्फ आश्वासन के आधार पर आंदोलन खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं. वे सरकार से मांगों पर ठोस फैसला चाहते हैं.
प्रतिनिधिमंडल की बैठक पर अब भी आधिकारिक सूचना का इंतजार
छात्र नेता ने यह भी बताया कि जिस प्रतिनिधिमंडल के जरिए सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की बात कही गई थी, उस संबंध में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि बैठक के लिए सहमति, स्थान और समय को लेकर फिलहाल स्पष्ट जानकारी उनके पास नहीं है.
रविंद्र पासवान के मुताबिक, छात्र प्रशासन की ओर से औपचारिक सूचना का इंतजार कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक बातचीत की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती, तब तक आंदोलन अपनी जगह जारी रहेगा.
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे इस छात्र आंदोलन के बीच राहुल गांधी से हुई बातचीत ने राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा बढ़ा दी है. छात्रों ने जहां अपनी मांगों को लेकर कांग्रेस से स्पष्ट हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई है, वहीं राहुल गांधी की ओर से मांगों को WhatsApp पर भेजने और सरकार से बातचीत करने का भरोसा दिया गया है. अब प्रदर्शनकारियों की नजर आगे होने वाली सरकारी कार्रवाई पर है.
सत्यजीत कुमार