ये कहानी झारखंड के गढ़वा की है. यहां घर बनाने के लिए जमीन की खुदाई चल रही थी. जेसीबी अपना काम कर रही थी. मिट्टी निकल रही थी और काम आगे बढ़ रहा था. तभी जमीन के नीचे कुछ ऐसा दिखा कि काम रुक गया. मिट्टी में दबा हुआ था एक लोहे का संदूक. संदूक दिखते ही वहां मौजूद लोगों की नजर उस पर टिक गई. फिर किसी ने आसपास के लोगों को बताया. बात आगे बढ़ी और देखते ही देखते खबर पूरे इलाके में फैल गई.
कुछ ही देर में वहां भीड़ जमा हो गई. कोई उसे पुराना बक्सा बता रहा था. कोई उसके अंदर कीमती सामान होने की बात कर रहा था. कुछ लोगों को तो उसमें खजाना होने की उम्मीद भी दिखने लगी. लेकिन कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट अभी बाकी था. संदूक खुला भी नहीं था और उस पर करीब 40 परिवारों ने अपना दावा जता दिया. अब सवाल है कि आखिर जमीन के नीचे दबे इस लोहे के संदूक में ऐसा क्या है? और इतने सारे परिवार उस पर अपना हक क्यों जता रहे हैं?
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मामला झारखंड के गढ़वा जिले का है. गढ़वा के रमना प्रखंड मुख्यालय के नीचे बाजार इलाके में एक प्राचीन शिव मंदिर के पास घर निर्माण का काम चल रहा था. इसके लिए जेसीबी से जमीन की खुदाई की जा रही थी. सब कुछ सामान्य था. तभी खुदाई के दौरान जमीन के अंदर एक लोहे का संदूक दिखाई दिया.
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जेसीबी का काम रुका और आसपास मौजूद मजदूरों व लोगों का ध्यान उस संदूक की तरफ चला गया. जमीन के अंदर दबा संदूक कोई रोज मिलने वाली चीज तो थी नहीं. बस फिर क्या था. संदूक मिलने की खबर फैल गई.
कोई खजाना बता रहा था, कोई पुरानी संपत्ति
जैसे-जैसे लोगों को जानकारी मिली, मौके पर भीड़ बढ़ती गई. हर किसी की अपनी थ्योरी थी. कोई कह रहा था कि संदूक में पुराने जमाने का सामान हो सकता है. किसी को लग रहा था कि उसके अंदर कीमती चीजें होंगी. कुछ लोग इसे खजाने से जोड़कर भी देखने लगे. हालांकि, अभी तक इन बातों की कोई पुष्टि नहीं हुई है. असल बात तो यही है कि संदूक के अंदर क्या है, किसी को नहीं पता. और शायद यही रहस्य लोगों की उत्सुकता और बढ़ा रहा है.
मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब संदूक पर दावा करने वाले लोग सामने आने लगे. तीन पीढ़ियों से जुड़े करीब 40 परिवारों ने इस संदूक पर अपना हक जताया है. अब यहां से कहानी सिर्फ 'जमीन से मिला एक रहस्यमयी संदूक' भर नहीं रह जाती. सवाल है कि आखिर इतने परिवारों का इस संदूक से क्या संबंध है?
क्या यह किसी पुराने परिवार की संपत्ति थी? क्या जमीन में इसे जानबूझकर दबाया गया था? या फिर इसके पीछे कोई ऐसी कहानी है, जो अब तक लोगों को पता ही नहीं थी? फिलहाल इन सवालों के जवाब नहीं मिले हैं. लेकिन संदूक खुलने से पहले ही उस पर इतने लोगों का दावा जरूर पूरे मामले को और दिलचस्प बना रहा है.
संदूक को लेकर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी. दावा करने वाले भी सामने आने लगे. ऐसे में विवाद की स्थिति बनने की आशंका पैदा हो गई. पुलिस को इसकी सूचना दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची और लोहे के संदूक को अपने कब्जे में ले लिया. अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि संदूक जमीन के अंदर कब और कैसे पहुंचा. उसका असली मालिक कौन है. और सबसे अहम सवाल उसके अंदर आखिर क्या है?
वहीं लोगों ने अपनी-अपनी बातें शुरू कर दी हैं. कोई पुराने सामान की बात कर रहा है, कोई कीमती वस्तुओं की और कोई खजाने की. लेकिन फिलहाल ये सब सिर्फ कयास हैं. सच्चाई उस लोहे के संदूक के अंदर बंद है. अब पुलिस की जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि जमीन के नीचे आखिर क्या दबा हुआ था और उस संदूक पर दावा करने वाले 40 परिवारों का उससे क्या संबंध है.
चंदन कुमार कश्यप