सोचिए... जिस पुलिस से बचने के लिए दो आरोपी शहर बदलकर हजारों किलोमीटर दूर आकर छिपे हों, वही पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए उनकी गली में पहुंच जाए. लेकिन वर्दी में नहीं. पुलिस ने भेष बदला और तीर्थयात्रियों की तरह इलाके में घूमने लगी. एक-दो दिन नहीं, करीब 20 दिन तक... हर आवाजाही पर नजर, हर संदिग्ध गतिविधि पर निगाह... और फिर एक दिन जब पुलिस पहुंची तो पता चला कि आरोपी जमशेदपुर के सोनारी इलाके में किराये पर परिवार के साथ रह रहे थे. पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों ने कर्नाटक के बीदर में ATM कैश वैन से 93 लाख रुपये लूटे और इस दौरान कैश कस्टोडियन की हत्या कर दी. करीब 19 महीने पुराने इस केस में अब दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
तारीख थी 16 जनवरी 2025... कर्नाटक के बीदर में SBI की एक शाखा के ATM में कैश डालने के लिए कैश वैन पहुंची थी. टीम के पास बड़ी रकम थी. तभी दो बाइक सवार बदमाश वहां पहुंचे. पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी. इस हमले में कैश कस्टोडियन वेंकटेश की मौत हो गई. एक सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हुआ. और फिर बदमाश कैश बॉक्स लेकर भाग निकले. कैश बॉक्स में करीब 93 लाख रुपये थे. उस दिन बीदर में जो हुआ, उसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की, लेकिन कहानी का अगला चैप्टर जमशेदपुर में खुला.
यह भी पढ़ें: पिस्टल तानी, गोली मारने की धमकी दी और 80 हजार लूटकर भागे बदमाश, ग्रेटर नोएडा में साइबर कैफे पर धावा
पुलिस को जांच के दौरान सुराग मिला कि आरोपी झारखंड के जमशेदपुर में छिपे हो सकते हैं. लेकिन समस्या ये थी कि अगर पुलिस सीधे वर्दी में पहुंचती, तो आरोपी सतर्क हो सकते थे. इसलिए पुलिस ने एक अलग तरीका अपनाया. जांच टीम के पुलिसकर्मी तीर्थयात्रियों का भेष बनाकर इलाके में घूमने लगे.
अब जरा तस्वीर समझिए. एक तरफ आरोपी अपने किराये के घर में परिवार के साथ रह रहे थे. दूसरी तरफ उनके आसपास घूम रहे कुछ लोग असल में पुलिस वाले थे. पुलिस करीब 20 दिन तक इलाके की निगरानी करती रही. कौन घर से निकल रहा है? किससे मिल रहा है? कौन सी बाइक इस्तेमाल हो रही है? किस समय घर आता-जाता है? इन तमाम चीजों पर नजर रखी गई. धीरे-धीरे पुलिस को यकीन हो गया कि तलाश जिस ठिकाने की थी, वह मिल चुका है.
जमशेदपुर के सोनारी इलाके के परदेशीपाड़ा में दोनों आरोपी अलग-अलग किराये के मकानों में रह रहे थे. पुलिस ने जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया, उनकी पहचान आलोक कुमार उर्फ अंबानी और अमन सिंह के रूप में हुई है. दोनों बिहार के वैशाली के रहने वाले बताए गए हैं. सबसे दिलचस्प बात ये कि दोनों यहां अकेले नहीं थे. वे अपने परिवार के साथ रह रहे थे. यानी बाहर से एक सामान्य पारिवारिक जिंदगी... लेकिन पुलिस के रिकॉर्ड में दोनों 93 लाख की लूट और हत्या के केस के मुख्य आरोपी थे.
फिर पुलिस ने दरवाजा खटखटाया
मंगलवार सुबह कर्नाटक पुलिस ने परदेशीपाड़ा में छापेमारी की. गिरफ्तारी के बाद आरोपियों के ठिकानों की तलाशी ली गई. और यहीं एक और सुराग मिला. पुलिस के मुताबिक, बाइक की टंकी से दो जिंदा कारतूस बरामद हुए. इसके अलावा दो पिस्तौल, महत्वपूर्ण दस्तावेज और करीब 1.50 लाख रुपये नकद भी मिले. अब पुलिस ये पता लगाने में जुटी है कि ये हथियार कहां से आए थे. क्या इनका इस्तेमाल बीदर की वारदात में हुआ था? और अगर हुआ था तो बाकी हथियार और लूटी गई रकम कहां है?
पूछताछ और जांच में पुलिस को कथित तौर पर यह भी पता चला कि दोनों आरोपियों के तार दूसरे राज्यों की घटनाओं से जुड़ सकते हैं. पुलिस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और तेलंगाना के हैदराबाद में हुई कुछ लूट और फायरिंग की घटनाओं में भी दोनों की भूमिका की जांच की जा रही है. यानी बीदर की 93 लाख रुपये वाली लूट कहीं एक अकेली वारदात तो नहीं थी? क्या दोनों किसी बड़े गिरोह का हिस्सा थे? क्या लूट के बाद रकम अलग-अलग जगहों पर बांटी गई? हथियारों की सप्लाई कौन करता था? इन सवालों के जवाब अब पूछताछ में तलाशे जा रहे हैं.
16 जनवरी 2025 को बीदर में हुई इस वारदात के बाद पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में करीब 19 महीने लगे. इस दौरान आरोपी कथित तौर पर कई जगहों पर छिपते रहे और आखिरकार जमशेदपुर में परिवार के साथ रहने लगे. लेकिन पुलिस ने यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा. करीब 20 दिन तक भेष बदलकर निगरानी की और फिर दोनों को दबोच लिया. अब कहानी का अगला हिस्सा पुलिस पूछताछ से सामने आएगा- 93 लाख रुपये आखिर कहां गए? बीदर की वारदात में और कौन शामिल था? बरामद पिस्तौल का इस्तेमाल कहां हुआ? और क्या मिर्जापुर-हैदराबाद की घटनाओं में भी यही गिरोह शामिल था? फिलहाल दो आरोपी गिरफ्तार हैं, हथियार और नकदी बरामद होने का पुलिस दावा है और करीब 19 महीने पुराने केस की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है.
aajtak.in