नेशनल कॉन्फ्रेंस में नहीं थम रही कलह, 10 नाराज विधायकों की बंद कमरे में तीसरी बैठक

जम्मू-कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हालिया कैबिनेट फेरबदल के बाद पार्टी में कलह खुलकर सामने आई हैं. नाराज विधायकों की लगातार बैठकें हो रही हैं, जिनमें उनकी मांगों और रणनीति पर चर्चा हो रही है. बुधवार को एक बार फिर नाराज विधायकों ने बंद कमरे में अहम मीटिंग की.

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उमर अब्दुल्ला के कैबिनेट विस्तार के बाद से पार्टी में कलह तेज हो गई है. (Photo- ITGD) उमर अब्दुल्ला के कैबिनेट विस्तार के बाद से पार्टी में कलह तेज हो गई है. (Photo- ITGD)

मीर फरीद

  • श्रीनगर,
  • 04 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:50 PM IST

जम्मू-कश्मीर की सियासत में नेशनल कॉन्फ्रेंस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हाल ही में किए गए कैबिनेट फेरबदल के बाद पार्टी के भीतर दरार खुलकर सामने आ गई है. बुधवार को श्रीनगर में नाराज विधायकों की एक और गुप्त बैठक हुई, जिसमें पार्टी के 10 से 15 बागी विधायक शामिल हुए.

इस बैठक में विधायकों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए आगे की रणनीति पर चर्चा की. कैबिनेट फेरबदल के बाद बागी विधायकों की बंद कमरे में ये तीसरी ऐसी बैठक है.

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दरअसल 27 अक्टूबर को महीनों के इंतजार के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था. सरकार को मजबूत करने और खाली जगह भरने के लिए उठाया गया ये कदम अब पार्टी के लिए गले की फांस बन गया है. जिन विधायकों को मंत्री पद की उम्मीद थी, उन्हें जगह न मिलने पर उनका गुस्सा फूट पड़ा है.

मुबारक गुल का अल्टीमेटम और सांसद रुहुल्लाह का इस्तीफा

नाराज विधायकों की ये बैठक ठीक उस दिन हुई है जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और छह बार के विधायक मुबारक गुल की दी गई डेडलाइन खत्म हो गई. मंत्री पद समेत अपनी कई मांगों को लेकर मुबारक गुल ने 27 अक्टूबर को 4 नवंबर तक की समयसीमा तय की थी. हालांकि, बुधवार को अपने समर्थकों से मिलने और बैठक करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुबारक गुल ने खुलकर कुछ कहने से इनकार कर दिया.

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उन्होंने कहा, 'मैं अपने साथियों की भावनाओं का पूरा सम्मान करता हूं, जो लगभग 75 साल पुरानी हैं. ईश्वर ने चाहा तो सही समय पर चीजें सामने आएंगी. मेरे पास कहने के लिए अब और कोई बयान नहीं है.' उन्होंने आगे कहा कि वो एक फाइटर हैं और संघर्ष जारी रखेंगे.

दूसरी ओर, पार्टी का संकट तब और गहरा गया जब श्रीनगर से लोकसभा सांसद और प्रभावशाली शिया नेता सैयद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. रुहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व, विशेषकर फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला पर आर्टिकल 370 की बहाली की लड़ाई छोड़ने का आरोप लगाया और एक नया राजनीतिक दल बनाने के संकेत दिए.

शुक्रवार को फारूक अब्दुल्ला से मिल सकते हैं बागी विधायक

नेशनल कॉन्फ्रेंस में मचे इस घमासान को शांत करने के लिए अब उच्च नेतृत्व सक्रिय हो गया है. सूत्रों के मुताबिक, असंतुष्ट विधायकों का ये बागी गुट शुक्रवार को पार्टी संरक्षक फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात कर सकता है. बागी गुट के कम से कम पांच वरिष्ठ विधायक इस बैठक में शामिल होकर पार्टी के सामने अपना प्रस्ताव रखेंगे.

यह भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर: बगावत की आग बुझाने में जुटी उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस

हालांकि पार्टी हाईकमान ने व्यक्तिगत रूप से विधायकों को मनाने की कोशिश की थी, लेकिन बागी विधायक अब भी अपनी मांगों पर अड़े हैं.

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