जम्मू-कश्मीर के कठुआ में CISF कैंप में हुई फायरिंग के मामले में जांच तेज कर दी गई है. CISF ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित की है. बुधवार को दिल्ली से CISF के सीनियर अधिकारियों की एक टीम भी जम्मू-कश्मीर के कठुआ पहुंची है. टीम पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है.
यह घटना कठुआ के बसोली इलाके में स्थित सेवा-2 हाइडल प्रोजेक्ट में हुई थी. यहां सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF की है. दरअसल, 29 सितंबर की शाम एक CISF हेड कॉन्स्टेबल ने अपने ही साथियों पर फायरिंग कर दी थी. इस घटना में चार जवानों की मौत हो गई. मरने वालों में एक असिस्टेंट कमांडेंट भी शामिल थे.
मृतकों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कॉन्स्टेबल संजीव कुमार और कॉन्स्टेबल मोहम्मद रफीक के तौर पर हुई है.
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दरअसल, घटना के समय जवानों के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी. इसी दौरान फायरिंग की घटना हुई. हालांकि, फायरिंग की असली वजह क्या थी, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है. CISF और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं.
CISF की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में क्या होगी जांच?
CISF हेडक्वार्टर ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं. इस जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि फायरिंग से पहले कैंप में क्या हुआ था. जवानों के बीच कोई विवाद था या नहीं, घटना के समय कौन-कहां मौजूद था और फायरिंग की परिस्थितियां क्या थीं. इन सभी पहलुओं को देखा जाएगा. जांच में फायरिंग की वजह का भी पता लगाया जाएगा. CISF के DG खुद पूरे मामले की मॉनीटरिंग कर रहे हैं. कठुआ पुलिस की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची थी.
घटना की गंभीरता को देखते हुए CISF के सीनियर अधिकारियों की टीम दिल्ली से कठुआ पहुंची है. टीम घटनास्थल और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है.
CISF की ओर से गृह मंत्रालय (MHA) को मामले की शुरुआती रिपोर्ट भी भेजी गई है. आगे की जानकारी जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सामने आएगी. फिलहाल CISF की आंतरिक जांच और पुलिस की कार्रवाई दोनों जारी हैं. जांच पूरी होने के बाद ही फायरिंग के पीछे की सही वजह और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर साफ होगी.
जितेंद्र बहादुर सिंह