कभी दुकान में तो कभी सेब के बागान में... कश्मीर में जंगली भालुओं का आतंक, एक महीने में 15 पकड़े गए- VIDEO

कश्मीर के रिहायशी इलाकों, खेतों और स्कूल परिसरों में घुस रहे जंगली भालुओं में से एक महीने में 15 को पकड़ा गया. सिकुड़ते जंगल, सेब और खुले कूड़े की ओर खिंचते भालुओं से बढ़ते खतरे के बीच अधिकारियों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है.

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जम्मू-कश्मीर में सेब के मौसम में भालुओं का आतंक बढ़ गया है. (Photo- Screengrab) जम्मू-कश्मीर में सेब के मौसम में भालुओं का आतंक बढ़ गया है. (Photo- Screengrab)

मीर फरीद

  • नई दिल्ली,
  • 23 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:56 PM IST

जम्मू कश्मीर में जंगली भालुओं की बढ़ती आवाजाही से लोगों में डर का माहौल है. भालू जंगलों से निकलकर रिहायशी इलाकों, खेतों और स्कूल परिसरों तक पहुंच रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि वन्यजीव बचाव टीमों को लगातार मिल रही शिकायतों के बीच दिन-रात अभियान चलाना पड़ रहा है. पिछले एक महीने में उत्तर, मध्य और दक्षिण कश्मीर के अलग-अलग गांवों और कस्बों से 15 से ज्यादा जंगली भालुओं को जिंदा पकड़ा गया है.

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बचाव टीमों के पास भालुओं को पकड़ने के लिए पिंजरे, जाल और बेहोश करने वाली बंदूकें हैं. टीमें लगातार गश्त कर रही हैं, ताकि लोगों को अचानक भालू के सामने आने से होने वाले खतरे से बचाया जा सके. हाल ही में अनंतनाग के एक आबादी वाले इलाके में भी एक भालू को पकड़ा गया. बाद में उसे सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक ठिकाने, घने जंगल में छोड़ दिया गया. हालांकि, लगातार चल रहे इन अभियानों के बावजूद लोगों की चिंता कम नहीं हुई है.

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इस साल 6 लोगों की मौत, 100 से ज्यादा घायल

कश्मीर घाटी में इस साल जंगली जानवरों के हमलों में अब तक कम से कम छह लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के कारण गांवों और कस्बों में रहने वाले लोग सतर्क हैं.

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जंगलों में कमी और सेब की फसल बड़ी वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक, जंगली जानवरों के आबादी वाले इलाकों में आने की दो प्रमुख वजहें हैं. पहली, जंगलों के आसपास तेजी से हो रहे निर्माण के कारण उनके प्राकृतिक ठिकाने और भोजन के स्रोत कम हो रहे हैं. इंसानी बस्तियों का दायरा बढ़ने से इंसानों और जंगली जानवरों के बीच दूरी भी घट रही है.

दूसरी वजह सेब की फसल है. कश्मीर में इन दिनों सेब की कटाई चल रही है. भालू सेब के बागों और खुले कूड़ेदानों में भोजन तलाशने पहुंच रहे हैं. सर्दियों में शीतनिद्रा में जाने से पहले उन्हें ज्यादा ऊर्जा वाले भोजन की जरूरत होती है, इसलिए सेब उन्हें आकर्षित कर रहे हैं.

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वन्यजीव अधिकारियों ने दी सतर्क रहने की सलाह

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि बागों में गिरे हुए सेब जल्द हटा दें. सुबह जल्दी और सूर्यास्त के बाद अकेले बाहर निकलने से बचें. भालू दिखने पर उसके पास जाने या उसे खुद पकड़ने की कोशिश करने के बजाय वन्यजीव विभाग को सूचना दें.

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