चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर, तेजी से गिरता तापमान और इतना घना बादल कि कुछ मीटर आगे का रास्ता भी दिखाई देना मुश्किल. हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के ऊंचाई वाले इलाके में माउंट लियो पारगिल-2 के अभियान पर निकली 12 सदस्यीय टीम के सामने अचानक ऐसी स्थिति पैदा हो गई कि उसे अपना समिट अभियान बीच में ही रोकना पड़ा.
कोलकाता की हिमालयाज बीकन की टीम माउंट लियो पारगिल-2 की चोटी तक पहुंचने के अभियान पर थी. टीम ने 25 सितंबर की आधी रात के आसपास समिट अटेम्प्ट शुरू किया था, लेकिन ऊंचाई की तरफ बढ़ते समय एक सदस्य में हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के लक्षण दिखाई दिए. सदस्य की हालत को देखते हुए टीम ने जोखिम नहीं उठाया और समिट का प्रयास रोककर बेस कैंप लौटने का फैसला किया. इसके बाद मौसम ने मुश्किलें और बढ़ा दीं.
आधी रात शुरू हुआ था समिट अटेम्प्ट
मिशन टीम ने 17 सितंबर को नाको से अपना अभियान शुरू किया था. इसके बाद करीब चार दिन की यात्रा के बाद टीम 21 सितंबर को माउंट लियो पारगिल-2 के बेस कैंप पहुंची. बेस कैंप में जरूरी तैयारी के बाद टीम ने 25 सितंबर की आधी रात के आसपास चोटी की ओर बढ़ना शुरू किया. शुरुआत में अभियान आगे बढ़ रहा था, लेकिन ऊंचाई बढ़ने के साथ एक सदस्य में हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के लक्षण दिखाई देने लगे. ऐसी स्थिति में ज्यादा ऊंचाई पर आगे बढ़ना खतरनाक हो सकता था. टीम ने तत्काल समिट अटेम्प्ट रोकने का फैसला किया और सभी सदस्य वापस बेस कैंप की ओर लौट आए. लेकिन टीम के लिए असली चुनौती इसके बाद शुरू हुई.
रातभर होती रही भारी बर्फबारी
टीम के बेस कैंप लौटने के दौरान मौसम लगातार खराब होता चला गया. इलाके में रातभर भारी बर्फबारी हुई. तापमान करीब माइनस 14 से माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. लगातार गिरते तापमान और बर्फबारी ने मुश्किलें बढ़ा दीं. टीम के सामने अब दोहरी चुनौती थी. एक तरफ खराब मौसम में ऊंचाई वाले इलाके में रहना मुश्किल हो रहा था और दूसरी तरफ नीचे उतरने का रास्ता भी आसान नहीं था. टीम लीडर ने परिस्थितियों को देखते हुए सभी सदस्यों को ऊंचाई वाले इलाके से नीचे लाने का फैसला किया. नीचे उतरते समय मौसम और ज्यादा खराब हो गया. घने बादल, लगातार बर्फबारी और रास्ते पर जमा बर्फ के कारण इलाके में व्हाइटआउट जैसी स्थिति बन गई. व्हाइटआउट जैसी स्थिति में बर्फ, बादल और कम रोशनी के कारण जमीन और आसमान के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में सामने मौजूद रास्ता या आसपास की भौगोलिक स्थिति को पहचानना बेहद कठिन हो जाता है. यही स्थिति इस टीम के सामने भी आई. कम विजिबिलिटी के कारण टीम के सदस्यों के लिए आगे का रास्ता पहचानना मुश्किल हो रहा था. बर्फबारी लगातार जारी थी और तापमान भी बेहद कम था.
कुछ उम्रदराज सदस्य भी होने लगे बीमार
मुश्किल परिस्थितियों के बीच टीम के कुछ अधिक उम्र वाले सदस्य भी बीमार पड़ने लगे. स्थिति को देखते हुए टीम ने मामले को नजरअंदाज नहीं किया और मदद लेने का फैसला किया. टीम की ओर से ITBP, स्थानीय पुलिस और आसपास के लोगों से संपर्क किया गया. इसके बाद रेस्क्यू की कोशिश शुरू हुई. कठिन मौसम में फंसी टीम को सुरक्षित नीचे लाने के लिए ITBP के जवान, पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग मदद के लिए आगे आए. ऊंचाई वाले इलाके में बर्फबारी के बीच रेस्क्यू आसान नहीं था. रास्ते पर बर्फ जमा थी और कई जगह विजिबिलिटी बेहद कम थी. इसके बावजूद रेस्क्यू टीमों ने सावधानी के साथ आगे बढ़ते हुए अभियान दल के सदस्यों को सुरक्षित नीचे लाने का काम शुरू किया. एक-एक सदस्य को सुरक्षित तरीके से नीचे लाया गया और आखिरकार सभी 12 सदस्य नाको तक पहुंच गए.
चोटी तक नहीं पहुंच सका अभियान
इस पूरे घटनाक्रम में मिशन टीम माउंट लियो पारगिल-2 की चोटी तक नहीं पहुंच सकी. लेकिन ऊंचाई वाले इलाके में अचानक बदले मौसम और स्वास्थ्य संबंधी खतरे को देखते हुए टीम ने समय रहते समिट अभियान रोक दिया. इसके बाद खराब मौसम में नीचे उतरने के दौरान आई मुश्किलों के बावजूद ITBP, पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से सभी सदस्य सुरक्षित नाको पहुंच गए. यानी अभियान का लक्ष्य भले ही पूरा नहीं हुआ, लेकिन सबसे बड़ी राहत यह रही कि टीम के सभी 12 सदस्य सुरक्षित वापस लौट आए.
(रिपोर्ट- विशेषर नेगी)
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