हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित श्री चामुंडा नंदीकेश्वर धाम 400 साल पुराना मंदिर है. यह मंदिर देवी दुर्गा के उस उग्र रूप को समर्पित है, जिन्होंने चंड और मुंड नाम के राक्षसों का वध किया था. राक्षसों का वध देवी महात्म्य के अनुसार देवी कौशिकी ने अपनी भौंहों से चंडिका नाम की एक उग्र योद्धा को उत्पन्न किया, जिसने राक्षस सेनापतियों चंड और मुंड को मार डाला. इसके बाद कौशिकी ने उन्हें "चामुंडा" नाम देकर सम्मानित किया.
अब पंजाब के एक दानदाता ने देवी चामुंडा के सिंहासन के लिए 3 किलो सोना और मंदिर के गर्भगृह को सजाने के लिए 6 क्विंटल चांदी दान करने का फ़ैसला किया है. मंदिर के अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि 6 क्विंटल चांदी के अलावा मंदिर में पहले से ही 2.85 क्विंटल चांदी मौजूद थी, इसलिए कुल चांदी का इस्तेमाल मंदिर के गर्भगृह को सुंदर बनाने में किया जाएगा. हालांकि, दानदाता ने अधिकारियों से अपना नाम ज़ाहिर न करने को कहा है.
गर्भगृह में वियतनाम के मार्बल का होगा इस्तेमाल
गर्भगृह में इस्तेमाल के लिए वियतनाम से मार्बल लाया जा रहा है और मंदिर के बाकी हिस्सों में राजस्थान के मकराना का मार्बल इस्तेमाल किया जा रहा है. चामुंडा मंदिर हर साल देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता है. यह मंदिर बन्नेर खड्ड के किनारे स्थित है. मार्बल का काम ज़ोर-शोर से चल रहा है और उम्मीद है कि यह काम इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा.
नंदकेश्वर मंदिर को सुंदर बनाने का काम पहले ही पूरा हो चुका है, जहां भगवान शिव का एक स्वयंभू लिंग प्रकट हुआ है, जो ऊपर से लटके एक बड़े पत्थर से ढका हुआ है. मंदिर अधिकारी ने बताया कि यज्ञशाला का काम पूरा हो चुका है और मंदिर में अन्य काम दानदाताओं के दान से किए जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त रखी है.
पुरानी परंपरा के अनुसार नए शादीशुदा जोड़े इस मंदिर में आते हैं. इसके अलावा, देश के दूर-दराज़ इलाकों से भी लोग मंदिर में आते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. लगभग 400 से 700 साल पहले एक स्थानीय राजा और एक पुजारी ने देवी से प्रार्थना की कि वे अपना पवित्र स्थान पहाड़ी की दुर्गम चोटी से हटाकर घाटी में किसी आसानी से पहुंचने योग्य जगह पर ले आएं. देवी पुजारी के सपने में आईं और उनसे कहा कि वे बानेर नदी के किनारे वर्तमान स्थान पर खुदाई करें. वहां पत्थर की एक प्राचीन मूर्ति मिली.
मूर्ति का चमत्कार, शुरू में लोग समझते थे पत्थर
शुरू में, पुरुषों का एक बड़ा समूह उस पत्थर को उठा नहीं सका क्योंकि वे उसे साधारण चट्टान समझते थे. अगली सुबह जब पुजारी ने स्नान किया और सम्मानपूर्वक उसके पास गए, तो उन्होंने आसानी से मूर्ति को उठा लिया और उसे वर्तमान स्थान पर स्थापित कर दिया.
शिव और शक्ति एक साथ
इस मंदिर को नंदीकेश्वर धाम के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि देवी के मुख्य मंदिर के ठीक पीछे एक गुफा जैसी जगह में स्वयं प्रकट हुआ शिव लिंगम स्थित है. कांगड़ा ज़िले के चामुंडा शहर में मशहूर चामुंडा नंदकेश्वर धाम को सुंदर बनाने और उसके नवीनीकरण के काम ने लोगों का ध्यान खींचा है.
अशोक रैना