कुछ रिश्ते पास होकर भी दूर हो जाते हैं और कुछ रिश्ते दूर रहकर भी आखिरी वक्त में अपना फर्ज निभा जाते हैं. सोनीपत के वृद्धाश्रम में हुई कपड़ा व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता की मौत के बाद सामने आई कहानी कुछ ऐसी ही है. पिता की मौत के बाद उनकी तीनों बेटियां अंतिम रस्मों के लिए नहीं पहुंचीं. पहले वृद्धाश्रम प्रबंधन ने उनका अंतिम संस्कार कराया और अब अस्थियों के विसर्जन की जिम्मेदारी भी परिवार के एक सदस्य और समाजसेवियों ने निभाई.
बुधवार को हरिद्वार में शिवचरण गुप्ता की अस्थियों का विसर्जन उनके बड़े भाई महेंद्र गुप्ता ने किया. खास बात यह रही कि हरिद्वार पहुंचने से पहले महेंद्र गुप्ता को अपने भाई की मौत की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए मिली थी. करीब 10 साल से भाई के परिवार से उनका संपर्क नहीं था. जब वृद्धाश्रम प्रबंधन ने मृतक की बड़ी बेटी से दोबारा बातचीत की तो बेटी ने ऐसी बात कही, जिसका किसी को अंदाज नहीं था. बड़ी बेटी ने कहा अस्थियों का अच्छे से विसर्जन कर देना. आप मेरे पिता के छोटे भाई समझकर पूरी रस्में निभा देना. हम शर्मिंदा तो बहुत हैं, लेकिन हमारी कुछ मजबूरी रही होगी. बेटी ने यह भी कहा कि अगर उनकी तबीयत ठीक होती तो वह खुद हरिद्वार जरूर आतीं.
बेटियां नहीं पहुंचीं तो बड़े भाई ने उठाई जिम्मेदारी
शिवचरण गुप्ता की मौत के बाद उनकी तीनों बेटियों के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने का मामला पहले ही चर्चा में आ चुका था. अब अस्थि विसर्जन के दौरान भी बेटियां हरिद्वार नहीं पहुंचीं. ऐसे में शिवचरण गुप्ता के बड़े भाई महेंद्र गुप्ता आगे आए. उन्होंने हरिद्वार पहुंचकर अपने छोटे भाई की अस्थियों का विधि-विधान से विसर्जन किया. महेंद्र गुप्ता के साथ सामाजिक संस्थाओं से जुड़े कुछ लोग भी हरिद्वार पहुंचे. इस तरह परिवार की ओर से जो जिम्मेदारी बेटियों के नहीं पहुंचने के कारण अधूरी दिखाई दे रही थी, उसे बड़े भाई और समाजसेवियों ने पूरा किया. महेंद्र गुप्ता ने भाई की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करते हुए अंतिम रस्में निभाईं.
सोशल मीडिया से मिली भाई की मौत की खबर
महेंद्र गुप्ता के मुताबिक, पिछले करीब 10 साल से उनका अपने भाई शिवचरण गुप्ता और उनके परिवार से कोई संपर्क नहीं था. उन्हें अपने भाई की मौत की जानकारी परिवार से सीधे नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए मिली. उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले नेपाल में आए भूकंप के दौरान उन्हें लगा था कि शायद उनके भाई की मौत हो गई है. इसी धारणा के साथ उन्होंने अपने भाई को मृत मान लिया था.लेकिन बाद में सोशल मीडिया के जरिए उन्हें पता चला कि भाई जीवित थे और वृद्धाश्रम में रह रहे थे. अब उनकी मौत की खबर मिलने के बाद महेंद्र गुप्ता हरिद्वार पहुंचे और अंतिम रस्में निभाईं. महेंद्र ने कहा कि वह अपने भाई को करीब 10 साल पहले ही मृत मान चुके थे. अब जब सच्चाई सामने आई तो भाई की अस्थियों का विसर्जन करना उनका फर्ज था.
सात भाई-बहनों में बड़े भाई ने निभाया फर्ज
शिवचरण गुप्ता सात भाई-बहनों में से एक थे. उनके बड़े भाई महेंद्र गुप्ता अब उम्र के इस पड़ाव पर भी छोटे भाई की अंतिम रस्में निभाने के लिए आगे आए. यह स्थिति इसलिए भी भावुक है क्योंकि एक तरफ शिवचरण की तीन बेटियां अंतिम रस्मों में शामिल नहीं हो सकीं, वहीं दूसरी तरफ करीब एक दशक से संपर्क से दूर रहे उनके बड़े भाई ने सोशल मीडिया से जानकारी मिलने के बाद हरिद्वार पहुंचकर अस्थियों का विसर्जन किया. महेंद्र गुप्ता ने बेटियों की गैरमौजूदगी पर भी कठोर टिप्पणी नहीं की. उनका कहना था कि बेटियों की भी कोई मजबूरी रही होगी.
बेटी ने कहा- 'हम अपने पिता से बहुत प्यार करती थीं'
वृद्धाश्रम प्रबंधन ने बड़ी बेटी से दोबारा बातचीत की. बातचीत में बेटी ने अपने पिता के प्रति भावनाओं का जिक्र किया. बेटी ने कहा कि वह और उनकी बहनें अपने पिता से बहुत प्यार करती थीं. लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता उनके साथ रहने के लिए तैयार नहीं थे. बेटी ने अपनी मजबूरी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अगर उनकी तबीयत ठीक होती तो वह खुद हरिद्वार पहुंचतीं. उनका कहना था कि वह पिता की अस्थियों के विसर्जन को लेकर चिंतित थीं और चाहती थीं कि उनकी अंतिम रस्में अच्छे से पूरी हों. इसीलिए उन्होंने वृद्धाश्रम प्रबंधन से कहा कि अस्थियों का अच्छे से विसर्जन कर दिया जाए और उन्हें अपने पिता के छोटे भाई के समान मानकर पूरी रस्में निभाने दी जाएं.
'हम शर्मिंदा हैं, लेकिन हमारी कुछ मजबूरी रही होगी'
बड़ी बेटी कहा कि हम शर्मिंदा तो बहुत हैं, पर हमारी कुछ मजबूरी रही होगी. बेटियों के अंतिम रस्मों में शामिल नहीं होने के कारण जहां लगातार सवाल उठ रहे थे, वहीं बेटी ने अपनी ओर से सफाई देते हुए पिता के प्रति सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव की बात कही. उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहती हैं कि पिता की अंतिम रस्में पूरे सम्मान के साथ हों. बेटियों ने अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन की जिम्मेदारी वृद्धाश्रम प्रबंधन और परिवार के अन्य लोगों को सौंप दी है. हालांकि उन्होंने अपने पिता की **तेरहवीं की रस्म अपने घर पर करने की बात कही है. इस तरह पिता की अंतिम यात्रा में शामिल न हो पाने के बावजूद बेटियां अपने स्तर पर अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में निभाने की तैयारी कर रही हैं. वहीं अस्थि विसर्जन की जिम्मेदारी उनके बड़े चाचा महेंद्र गुप्ता ने निभाई. वृद्धाश्रम प्रबंधन के मुताबिक, बेटियों से दोबारा बातचीत के बाद उनका पक्ष भी सामने आया. बेटियों ने पिता के प्रति अपने लगाव की बात कही और अपनी परिस्थितियों का हवाला दिया.
अंतिम संस्कार से लेकर अस्थि विसर्जन तक संस्था ने निभाया फर्ज
शिवचरण गुप्ता की मौत के बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई थी. अब अस्थियों को हरिद्वार ले जाकर विसर्जित कराने की जिम्मेदारी भी संस्था और सामाजिक रूप से जुड़े लोगों ने संभाली. परिवार के करीबी सदस्य के रूप में बड़े भाई महेंद्र गुप्ता को जब जानकारी मिली तो वह खुद हरिद्वार पहुंचे. इस तरह अंतिम संस्कार से लेकर अस्थि विसर्जन तक की प्रक्रिया में वृद्धाश्रम प्रबंधन, समाजसेवियों और परिवार के बड़े भाई ने अपनी भूमिका निभाई.
पवन राठी