डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को 17 बार पैरोल मिलने और सजा पूरी कर चुके 'बंदी सिंहों' की अनदेखी पर सिख पंथ में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है. कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बरनाला में केंद्र और राज्य सरकारों पर सरेआम दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है.
पत्रकारों से बातचीत करते हुए जत्थेदार गड़गज्ज ने सरकारों की नीति पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि एक तरफ संगीन अपराधों में जेल काट रहे व्यक्ति को बार-बार पैरोल देकर जेल से बाहर भेजा जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ 35-35 सालों से जेलों में बंद और अपनी कानूनी सजाएं पूरी कर चुके बंदी सिंहों को पैरोल तक नहीं दी जा रही.
उन्होंने सवाल किया कि अगर सिरसे वाले बाबा को बार-बार पैरोल मिल सकती है, तो बंदी सिंहों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित क्यों रखा जा रहा है?
बीमार मां से मिलने के लिए भाई हवाला को मिले पैरोल
जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने भाई जगतार सिंह हवाला का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उनकी मां बहुत बीमार हैं. समूचा सिख पंथ, इंसानियत और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन मांग कर रहे हैं कि भाई हवाला को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए तुरंत पैरोल दी जाए.
उन्होंने कहा कि एक मां का अपने बेटे से मिलना बुनियादी मानवाधिकार है और इससे वंचित रखना सरासर नाइंसाफी है.
कई बंदी सिंहों की रिहाई पर उठाए सवाल
जत्थेदार गड़गज्ज ने कई बंदी सिंहों जैसे कि भाई बलवंत सिंह राजोआणा, भाई जगतार सिंह तारा, भाई परमजीत सिंह भ्योरा और प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई अटकी होने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि भाई राजोआणा की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का मामला लंबे समय से लटका हुआ है.
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उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के जरूरी फाइलों पर हस्ताक्षर न किए जाने की वजह से प्रो. भुल्लर की रिहाई में देरी हुई है. उन्होंने अपील की कि दोहरा मापदंड छोड़कर इंसानियत के नाते हू सही, भाई जगतार सिंह हवाला को तुरंत पैरोल दी जाए और सजाएं पूरी कर चुके सभी बंदी सिंहों को तुरंत रिहा किया जाए.
कमलजीत संधू