सतीश कौशिक के दोस्तों ने सुनाए बचपन की मस्ती के किस्से, बोले- उन्होंने पैतृक गांव में कराए कई काम  

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले का धनौंदा सतीश कौशिक का पैतृक गांव है. उनका जन्म 13 अप्रैल 1956 को दिल्ली में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. मगर, सतीश को अपने गांव से बेहद लगाव था. वह हर साल गांव लौटते थे और लोगों से मिलकर बातें करते थे. बचपन के दिनों में की गई मस्ती दोस्तों को अब तक याद है.

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सतीश कौशिक की फाइल फोटो. सतीश कौशिक की फाइल फोटो.

नवीन कुमार

  • महेंद्रगढ़,
  • 09 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 7:49 PM IST

फिल्म अभिनेता और डायरेक्टर सतीश कौशिक के निधन से हरियाणा में उनके पैतृक गांव धनौंदा में शोक की लहर है. ग्रामीणों ने इसे गांव के लिए अपूर्णीय क्षति बताया. महेंद्रगढ़ जिले के कनीना उपमंडल के गांव धनौंदा सतीश कौशिक का पैतृक गांव है. सतीश कौशिक का जन्म 13 अप्रैल 1956 को दिल्ली में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. बीती रात बुधवार को गुडगांव के फोर्टिस हॉस्पिटल में उन्होंने अंतिम सांस ली. गुरुवार को चार्टर्ड प्लेन से उनके पार्थिव शरीर को मुंबई ले जाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार होगा.

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गांव के सामाजिक कार्यों में होते थे शामिल- चचेरा भाई सुभाष

कनीना से दादरी रोड पर सतीश कौशिक का पैतृक गांव है. सतीश कौशिक बचपन में गर्मियों की छुट्टियों में गांव में आते थे. वह अपने गांव के लोगों से बहुत प्यार करते थे. सतीश कौशिक हर साल गांव धनौंदा में सामाजिक कार्यों में भाग लेते थे. इस दौरान वह अपने बचपन के दोस्तों के साथ पूरे गांव में घूमते थे.

सतीश कौशिक के चचेरे भाई सुभाष कौशिक ने बताया कि उनके चले जाने से सबसे अधिक क्षति उनको हुई है. दरअसल, वह उनका विशेष ध्यान रखते थे. वह गांव में साल में एक बार जरूर आते थे और यहां वे बाजरा की रोटी सरसों का साग बड़े प्यार से खाते थे. गांव में आने पर ऊंट गाड़ी पर बैठकर बहुत खुश होते थे.

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गांव आकर करते थे खूब मस्ती, कुश्ती में आता था मजा- दोस्त राजेंद्र सिंह   

सतीश कौशिक के दोस्त राजेंद्र सिंह नंबरदार ने बताया कि जब भी वह गांव में आते थे, पूरे गांव में घूमते थे. बचपन में जब वे छुट्टियों में आते थे तो हम सभी गुल्ली डंडा, कबड्डी, कुश्ती खेलते थे. गांव में बने बाबा दयाल के जोहड़ के पास बनी में जाकर पील खाते थे और जाल के पेड़ पर मौज मस्ती करते थे. उन्होंने बताया कि सतीश कौशिक ने हमें कई बार मुंबई आने के लिए कहा, लेकिन समय के अभाव के कारण हम वहां नहीं जा सके. आज हमें इसका बड़ा दुख हो रहा है.

गांव को दिलवाई थी एक करोड़ रुपये की मदद- दोस्त सूरत सिंह  

गांव में उनके दोस्त सूरत सिंह ने बताया कि वे जब भी गांव में आते थे, उनके यहां रुकते थे. समय-समय पर उनसे बातचीत कर गांव की जानकारी लेते रहते थे. उन्होंने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से गांव को एक करोड़ रुपये की ग्रांट दिलवाई थी, जिससे गांव में काफी विकास हुआ था.

गांव में कराए कई काम, मंदिर में स्थापित कराई मूर्ति- पड़ोसी अतरलाल   

सतीश कौशिक के पड़ोसी ठाकुर अतरलाल ने बताया जब वह बचपन में स्कूल की छुट्टियों में गांव आते थे, तब हम बड़ी मस्ती करते थे। जब वह वापस जाते थे, तो हम सभी बड़े भावुक हो जाते थे और उनका अगले साल आने का इंतजार करते थे. आज उनको जाने से हमें बहुत क्षति हुई है. उन्होंने 2010 में गांव के राधा कृष्णा मंदिर में मूर्ति की स्थापना करवाई, गांव के जोहड़ की सफाई करवाई, सरकार के सहयोग से स्टेडियम बनवाया और सरकार से गांव में काफी ग्रांट भी दिलवाई. 

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चचेरे भाई के लड़के सुनील ने बताया एक बुलावे पर चले आते थे गांव 

सतीश कौशिक के चचेरे भाई के लड़के सुनील ने बताया मेरे ताऊजी जब भी गांव में आते, तो पहले मुझे फोन करते. गांव में जो भी कार्यक्रम होता, गांव के लोग जब उनको बुलाते, वे अपने काम छोड़कर गांव में पहुंचते थे. वे कहते थे कि यह मेरा गांव पैतृक गांव है, मुझे इससे सबसे अधिक लगाव है. आज उनके अचानक छोड़कर चले जाने से गांव के लिए सबसे बड़ी क्षति हुई है. सुबह से ही क्षेत्र के लोगों का हमारे घर आने-जाने का सिलसिला लगा हुआ है. सभी उनके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हैं.

दिल्ली में पढ़े थे सतीश कौशिक, मुंबई में रहते हैं दोनों बड़े भाई  

दिवंगत सतीश कौशिक के पिताजी दो भाई थे. बड़े का नाम गोवर्धन और छोटे भाई का नाम बनवारी लाल है. जबकि सतीश कौशिक के बड़े भाई का नाम ब्रह्म प्रकाश, मंझले भाई का नाम अशोक है. सतीश उनमें सबसे छोटे थे. सतीश कौशिक के दोनों सगे भाई ब्रह्म कौशिक और अशोक कौशिक कौशिक मुंबई में रहते हैं.

उनकी 3 बहनें सरस्वती देवी, शकुंतला देवी और सविता देवी हैं. सतीश कौशिक के पिता बनवारीलाल दिल्ली में मुनीम का काम करते थे. कुछ समय बाद उन्होंने हैरिसन कंपनी की एजेंसी ली थी. सतीश कौशिक की पढ़ाई दिल्ली के ही स्कूलों में हुई.

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