राजकोट के याज्ञनिक रोड पर रहने वालीं और सेवानिवृत्त 80 वर्षीय महिला डॉक्टर को 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर 58.50 लाख रुपये ठगने के सनसनीखेज मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने अहमदाबाद से दो कारखाना मालिकों (जो आपस में साले-बहनोई हैं) को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने 6 प्रतिशत कमीशन के लालच में अपनी कंपनी का करंट अकाउंट किराए पर दिया था.
अहमदाबाद में कारखाना चलाते हैं आरोपी
पुलिस जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि 6 दिनों में आरोपियों के अकाउंट में साइबर धोखाधड़ी के जरिए 2.50 करोड़ रुपये जमा हुए थे. पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण और बैंक खातों की पड़ताल के बाद, पुलिस ने अहमदाबाद से दर्शन मकवाना और शुभम परमार को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए दोनों आरोपी अहमदाबाद में कारखाने चलाते हैं.
उन्होंने केवल 6 प्रतिशत कमीशन के लालच में अपनी कंपनी का चालू खाता (करंट अकाउंट) मुख्य साइबर माफियाओं को किराए पर दिया था. इस खाते में एक वृद्धा से ठगे गए 58.50 लाख रुपये जमा कराए गए और मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचाए गए. इतना ही नहीं, जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इसी चालू खाते में अब तक देशभर से साइबर धोखाधड़ी के 2.50 करोड़ रुपये जमा हुए हैं.
पुलिस ने आरोपियों से 1.20 लाख रुपये कीमत के 4 महंगे मोबाइल फोन और डेल कंपनी का एक लैपटॉप जब्त किया है. पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि पकड़े गए दोनों व्यक्ति केवल 'म्यूल अकाउंट प्रोवाइडर' (धोखाधड़ी के लिए खाते उपलब्ध कराने वाले) हैं. फिलहाल पुलिस अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचने और बैंक खाते के वित्तीय लेन-देन को फ्रीज (सीज) कराने की कार्रवाई कर रही है.
क्या था मामला
राजकोट में रहने वाली 80 वर्षीय सेवानिवृत्त डॉक्टर को पिछले 21 सितंबर को एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर से कॉल आया था. इसमें संजय सिंह नाम के एक हिंदी भाषी व्यक्ति ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का PSI बताते हुए कहा कि मुंबई की इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के मैनेजर हितेश मेहता के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी के दौरान उनके (डॉक्टर के) नाम का आधार कार्ड और एटीएम कार्ड मिला है.
इस मामले में गिरफ्तारी की धमकी दी गई और उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें घर से बाहर न निकलने यानी 'हाउस अरेस्ट' में रहने का निर्देश दिया गया. इसके बाद 'अनिल सर' नाम के खाकी वर्दीधारी डीसीपी के साथ वीडियो कॉल करवाकर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया और 58 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए गए. इसके बाद 21 लाख फिर ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया गया. लेकिन बैंककर्मियों की सतर्कता से महिला बच गई.
ब्रिजेश दोशी