मंगलवार को विपक्ष पर अपना हमला तेज़ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन लोगों के लिए 'नाराज़ फूफा जी' वाले अपने संबोधन का फिर से इस्तेमाल किया जो उनकी सरकार के विकास कार्यों पर सवाल उठाते हैं.
पीएम मोदी ने गुजरात के वडोदरा में 'नमो फॉर विकसित भारत' कार्यक्रम में ये बातें कहीं. इस कार्यक्रम में उन्होंने 35,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और उनकी आधारशिला रखी. इन परियोजनाओं में 2,800 किलोमीटर लंबा डेडिकेटेड रेल फ्रेट कॉरिडोर भी शामिल है, जिसे उन्होंने "21वीं सदी की ऐतिहासिक उपलब्धि" बताया.
इस कॉरिडोर का ज़िक्र करते हुए बीजेपी और कांग्रेस सरकारों के "काम करने के तरीके" में फ़र्क बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का प्लान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय में बना था, लेकिन मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के दौरान इसमें बहुत कम प्रगति हुई.
उन्होंने कहा, "फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट का प्लान 2004 में बना था, लेकिन 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने तक इस पर कोई काम नहीं हुआ."
प्रधानमंत्री मोदी ने किसी का नाम लिए बिना उन आलोचकों पर तंज कसा जो इस प्रोजेक्ट की उपयोगिता पर सवाल उठाते थे. उन्होंने कहा, "अभी जो नाराज फूफा जी हैं, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा? ट्रक कहां जाएंगे? जिन्होंने ट्रक खरीदा उनका क्या होगा? अब फूफा जी को काम मिल गया."
पीएम मोदी ने कहा कि कहा कि फ्रेट कॉरिडोर उन जगहों तक रेल कनेक्टिविटी पहुंचा रहा है, जहां आज़ादी के बाद भी यह सुविधा नहीं थी. उन्होंने आगे कहा कि यह प्रोजेक्ट 'आत्मनिर्भरता' को मज़बूत करने के लिए एक भारतीय सप्लाई चेन बनाने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है.
पूर्ववर्ती UPA सरकार पर एक और तंज कसते हुए PM मोदी ने कहा, "2014 के बाद भारत ने 50,000 आधुनिक रेलवे कोच बनाए; पिछली सरकार 10 साल में 50,000 शौचालय भी नहीं बना पाई थी."
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब मैन्युफैक्चरिंग के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है. "चिप से लेकर जहाज तक" जिसमें कंपोनेंट्स और तैयार उत्पाद दोनों ही देश में बनाए जा रहे हैं.
जब PM ने 'नाराज फूफा जी' शब्द का इस्तेमाल किया
"नाराज फूफा जी" आलोचकों के लिए PM मोदी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्यंग्यात्मक नामों की बढ़ती सूची में सबसे लैटेस्ट नाम है. उन्होंने पहली बार पिछले सप्ताह श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में इस शब्द का इस्तेमाल किया था, जहां युवा मतदाताओं तक पहुंचने के प्रयास के तहत उनके भाषण में 'जेन-ज़ी' की भाषा का भी इस्तेमाल किया गया था.
इस कार्यक्रम में उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधते हुए यह बात कही, जिन्होंने 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा कि "नकारात्मक सोच वाले लोगों" ने सरकारी प्रयासों का विरोध करना एक खेल बना लिया है.
उन्होंने कहा, "कैंपस के बाहर आपको दो तरह के लोग मिलेंगे: एक वे जो समाज की ताकत को सकारात्मक रूप से देश की ताकत में बदलते हैं और दूसरे वे जो कोई भी काम शुरू होते ही 'नाराज़ फूफा' बन जाते हैं."
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