ट्रेन से टकराया शेर, रेलवे ट्रैक पर मिली सिर्फ पूंछ! वन विभाग ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन

गुजरात के अमरेली जिले में  लिलिया-दामनगर क्षेत्र के रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने से एक शेर घायल हो गया. वन विभाग के मुताबिक, पीपावाव से ढसा जा रही मालगाड़ी के दौरान लाठी तालुका में दो शेर रेलवे लाइन पार कर रहे थे. हादसे के बाद ट्रैक पर शेर की कटी पूंछ और बाल मिले. घायल शेर के आसपास के खेतों की ओर जाने की जानकारी के बाद वन विभाग ने तलाशी अभियान शुरू किया है. 

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ट्रेन की चपेट में आने से एक शेर घायल हो गया, ट्रैक पर उसकी पूंछ मिली है (Photo:AI generated) ट्रेन की चपेट में आने से एक शेर घायल हो गया, ट्रैक पर उसकी पूंछ मिली है (Photo:AI generated)

ब्रिजेश दोशी

  • अमहदाबाद ,
  • 22 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

गुजरात के अमरेली जिले में गुरुवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने रेलवे ट्रैक पर शेरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. पीपावाव से ढसा की ओर जा रही एक मालगाड़ी की चपेट में आने से एक शेर घायल हो गया. घटनास्थल पर रेलवे ट्रैक के पास शेर की कटी हुई पूंछ और बाल मिले हैं. इसके बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू कर दिया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, घायल शेर वहां से निकलकर आसपास के खेतों की ओर चला गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उसका पता नहीं चल पाया था.

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यह घटना लाठी तालुका के रेलवे ट्रैक पर हुई. वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, घटना के समय दो शेर रेलवे लाइन पार कर रहे थे. इसी दौरान मालगाड़ी की चपेट में एक शेर आ गया. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि घायल शेर की हालत कैसी है और वह कहां छिपा हुआ है. वन विभाग की टीम आसपास के खेतों में उसके निशान तलाश रही है.

60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर रही थी मालगाड़ी

वन विभाग के अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक, पीपावाव से ढसा की ओर जा रही मालगाड़ी, जिसका ट्रेन नंबर PPSP-SVP बताया गया है, लिलिया क्षेत्र से गुजर रही थी. ट्रेन की रफ्तार लगभग 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा थी. इसी दौरान लाठी तालुका में रेलवे ट्रैक के पोल नंबर 18/9 और 18/8 के बीच यह हादसा हुआ. बताया गया कि उस समय दो शेर रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे. तभी मालगाड़ी का पहिया एक शेर की पूंछ पर चढ़ गया. हादसे में उसकी पूंछ कट गई और शेर घायल हो गया. घटना के बाद मालगाड़ी को रोक दिया गया. ट्रैक पर शेर की पूंछ और बाल मिलने से घटना की गंभीरता का पता चला. हालांकि, घायल शेर को प्रत्यक्ष रूप से देखे जाने और उसकी मौजूदा स्थिति की पुष्टि अभी नहीं हुई है. इसलिए उसकी चोट कितनी गंभीर है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है.

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खेतों की ओर भागा घायल शेर, वन विभाग की तलाश जारी

हादसे के बाद घायल शेर आसपास के राजस्व क्षेत्र के खेतों की ओर चला गया. वन विभाग के कर्मचारियों को आसपास के खेतों में उसकी गतिविधियों के निशान मिलने की जानकारी दी गई है. इसके बाद टीम ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया. वन विभाग की प्राथमिकता घायल शेर का पता लगाना और उसकी स्थिति का आकलन करना है. घायल वन्यजीव दर्द और डर की वजह से झाड़ियों या खेतों में छिप सकता है. ऐसे में उसकी तलाश के दौरान सावधानी बरतना भी जरूरी है, ताकि जानवर और आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. फिलहाल वन विभाग की टीम मौके पर मौजूद रहकर जांच कर रही है. शेर के मिलने के बाद ही उसकी चोट, उपचार की जरूरत और आगे की कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी.

इस इलाके में शेरों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना ने लिलिया-दामनगर क्षेत्र के रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, उसे उन क्षेत्रों में शामिल नहीं किया गया है जहां शेरों की आवाजाही को देखते हुए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. स्थानीय स्तर पर यह मांग भी उठ रही है कि रेलवे लाइन के आसपास शेरों की आवाजाही वाले इलाकों की पहचान की जाए और वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए. लोगों का कहना है कि राजुला और पीपावाव क्षेत्र की तरह इस इलाके में भी जरूरत के अनुसार निगरानी और कर्मचारियों की तैनाती पर विचार किया जाना चाहिए.

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शेरों की सुरक्षा के लिए स्थायी इंतजाम की मांग

गुजरात में एशियाई शेरों की सुरक्षा वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण मुद्दा है. रेलवे ट्रैक जंगलों, खेतों और वन्यजीवों की आवाजाही वाले इलाकों से गुजरते हैं. ऐसे स्थानों पर ट्रेन और वन्यजीवों के बीच टकराव का जोखिम बना रहता है. शेर प्रेमियों का कहना है कि संवेदनशील रेलखंडों पर निगरानी बढ़ाने, वन विभाग और रेलवे के बीच बेहतर तालमेल बनाने तथा शेरों की आवाजाही वाले स्थानों की नियमित पहचान करने की जरूरत है. जहां जोखिम अधिक हो, वहां परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और अन्य सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए. इस हादसे के बाद घायल शेर का पता लगाना सबसे जरूरी है. इसके साथ ही यह भी जांचना होगा कि जिस रेलखंड पर दुर्घटना हुई, वहां वन्यजीवों की आवाजाही के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त थी या नहीं.

घायल शेर की तलाश पर टिकी नजरें

22 अक्टूबर की सुबह हुए इस हादसे में शेर की पूंछ कटने की जानकारी सामने आई है, लेकिन घायल जानवर की वास्तविक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है. वन विभाग की टीम खेतों और आसपास के क्षेत्र में उसकी तलाश कर रही है. शेर मिलने के बाद उसके उपचार और सुरक्षा को लेकर आगे की कार्रवाई की जा सकेगी. साथ ही, घटना के कारणों और रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की सुरक्षा के इंतजामों की समीक्षा भी महत्वपूर्ण होगी. फिलहाल पूरे मामले में सबसे अहम बात यही है कि घायल शेर जल्द मिल जाए और उसे समय पर जरूरी उपचार उपलब्ध कराया जा सके.

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