फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले ने एक बार फिर कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर गोलीबारी हुई. इस घटना में अभिनेता सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर समेत दो लोग घायल हुए. पुलिस ने मामले की जांच के बाद तीन संदिग्धों को राजस्थान के कोटा से पकड़ा है. जांच एजेंसियां उनके कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने की पड़ताल कर रही हैं.
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर बाहर धमकियों और हमलों का सिलसिला कैसे जारी है. जब उसकी मुलाकातों और जेल से बाहर ले जाने पर सख्त पाबंदियां हैं, तो उसके गैंग के लोग फिल्मी सितारों को निशाना बनाने या धमकियां देने के लिए किसके इशारे पर काम कर रहे हैं. क्या जेल में बंद गैंगस्टर के निर्देश पर बाहर नेटवर्क चल रहा है, या उसके नाम का इस्तेमाल दूसरे लोग कर रहे हैं. इन सवालों के जवाब जांच से ही सामने आ सकते हैं.
2023 से साबरमती जेल में बंद है लॉरेंस बिश्नोई
लॉरेंस बिश्नोई साल 2023 से गुजरात की साबरमती जेल में बंद है. उसकी सुरक्षा को देखते हुए उसे हाई सिक्योरिटी जोन में रखा गया है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उसकी मुलाकातों पर कड़ी पाबंदियां हैं और कानूनी सहायता के लिए उसके वकीलों और कानूनी टीम को ही उससे मिलने की इजाजत है. उसे दूसरे कैदियों से अलग रखने की व्यवस्था भी सुरक्षा के लिहाज से की गई है.
लॉरेंस की जेल में मौजूदगी के बावजूद उसके गैंग का नाम अलग-अलग आपराधिक घटनाओं में सामने आता रहा है. यही वजह है कि टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद एक बार फिर जेल की सुरक्षा व्यवस्था और बाहर सक्रिय कथित नेटवर्क को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
हालांकि, किसी घटना में गैंग का नाम सामने आना और जेल में बंद लॉरेंस की ओर से उस घटना को निर्देशित किया जाना दो अलग बातें हैं. पुलिस को यह पता लगाना होगा कि हमले की योजना किसने बनाई, आरोपियों को किसने निर्देश दिए और जेल में बंद किसी व्यक्ति की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं.
गृह मंत्रालय के आदेश से जेल से बाहर ले जाने पर रोक
लॉरेंस बिश्नोई को लेकर अगस्त 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तत्कालीन आपराधिक प्रक्रिया संहिता यानी CrPC की धारा 268 के तहत आदेश जारी किया था. इस प्रावधान के तहत सरकार किसी कैदी को जेल से बाहर ले जाने पर रोक लगा सकती है. आदेश का उद्देश्य उसकी सुरक्षा और दूसरे राज्यों की पुलिस को उसकी हिरासत सौंपने से जुड़ी पाबंदियां लागू करना था.
इस आदेश के चलते दूसरे राज्य की पुलिस के लिए लॉरेंस को अपनी हिरासत में लेना आसान नहीं है. उसे किसी दूसरे राज्य में ले जाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी से जुड़ी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है. अदालतों में पेशी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराए जाने की व्यवस्था रही है.
यानी अगर मुंबई पुलिस को टाइगर श्रॉफ पर हमले के मामले में लॉरेंस से पूछताछ करनी है, तो उसे लागू कानूनी प्रक्रिया और जरूरी मंजूरियों का पालन करना होगा. पुलिस साबरमती जेल जाकर उससे पूछताछ करने का रास्ता अपना सकती है, लेकिन हिरासत में लेकर दूसरे राज्य में ले जाने के लिए अलग अनुमति की जरूरत पड़ सकती है.
राजस्थान पुलिस ने की थी पूछताछ, मुंबई पुलिस के सामने क्या विकल्प
अब तक लॉरेंस से पूछताछ के लिए दूसरे राज्यों की पुलिस के सामने कानूनी और प्रशासनिक मंजूरियों की चुनौती रही है. दी गई जानकारी के मुताबिक, राजस्थान पुलिस पहले साबरमती जेल जाकर उससे पूछताछ कर चुकी है. वहीं, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के समय भी मुंबई पुलिस की ओर से उसकी हिरासत लिए जाने की चर्चा थी, लेकिन उस वक्त उसे मुंबई नहीं लाया गया था.
टाइगर श्रॉफ पर हमले के मामले में अब मुंबई पुलिस के सामने भी यही सवाल है कि क्या वह साबरमती जेल जाकर लॉरेंस से पूछताछ करेगी या उसकी हिरासत के लिए संबंधित अदालत और केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुमति मांगेगी. इस मामले में आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि गिरफ्तार संदिग्धों से पूछताछ में क्या जानकारी मिलती है और जांच एजेंसियों को लॉरेंस से सीधे संबंध के क्या सबूत मिलते हैं.
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू जेल के भीतर और बाहर के नेटवर्क के बीच संभावित संपर्क है. अगर किसी गैंग के सदस्य जेल में बंद अपने सरगना के नाम पर धमकियां देते हैं, तो जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना जरूरी हो जाता है कि निर्देश कहां से आ रहे हैं. साथ ही यह भी देखना होगा कि कहीं दूसरे लोग गैंगस्टर के नाम का इस्तेमाल करके अपनी आपराधिक गतिविधियां तो नहीं चला रहे.
जेल में सख्त पहरा, फिर बाहर कैसे पहुंचती हैं धमकियां
जेल में बंद शख्स तक बाहरी संपर्क सीमित करना सुरक्षा का एक हिस्सा है. लेकिन बाहर मौजूद लोगों की गतिविधियों, कथित सहयोगियों और धमकी देने के तरीकों की जांच करना भी उतना ही जरूरी है. टाइगर श्रॉफ मामले में पुलिस को हमले के पीछे की पूरी साजिश, आरोपियों के संपर्क और कथित गैंग कनेक्शन की कड़ियां जोड़नी होंगी.
फिलहाल, लॉरेंस बिश्नोई की सीधी भूमिका को लेकर जांच के नतीजों का इंतजार है. टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि मुंबई पुलिस साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर से पूछताछ के लिए क्या कदम उठाती है और जांच में कथित नेटवर्क को लेकर क्या खुलासा होता है.
ब्रिजेश दोशी