गुजरात ATS को इनपुट मिला था कि एक नाइजीरियन नागरिक ने गुजरात के एक वांटेड आरोपी के साथ मुलाकात की है. दोनों के बीच ड्रग्स की एक बड़ी खेप भारत लाने को लेकर कथित तौर पर बातचीत हुई थी. इसके बाद गुजरात ATS और भारतीय कोस्ट गार्ड ने मिलकर ऑपरेशन शुरू किया. गुजरात ATS के डीआईजी सुनील जोशी के मुताबिक, इस ऑपरेशन की शुरुआत 14 सितंबर से हुई थी. एजेंसियां एक ईरानी नाव पर नजर रख रही थीं.
बताया गया कि यह नाव ईरान के कोणार्क बंदरगाह से निकली थी. इसके बाद पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से पांच पाकिस्तानी नागरिक कथित तौर पर इसमें सवार हुए. यानी नाव ईरान से निकली, रास्ते में पाकिस्तान से तस्कर सवार हुए और फिर भारत की ओर बढ़ने लगी.
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एजेंसियों को अंदेशा था कि इस नाव के जरिए ड्रग्स की बड़ी खेप भारत पहुंचाई जा रही है. जांच में सामने आया कि गुजरात ATS की कार्रवाई के चलते तस्करों ने कथित तौर पर ड्रग्स को गुजरात में उतारने की योजना बदल दी थी. नई योजना के मुताबिक, खेप को लक्षद्वीप के रास्ते कोच्चि ले जाने की कोशिश की जानी थी. लेकिन एजेंसियां पहले से अलर्ट थीं.
भारतीय कोस्ट गार्ड और गुजरात ATS की टीमें लगातार नाव की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं. जब ईरानी नाव लक्षद्वीप के पास पहुंची तो गुजरात ATS और भारतीय कोस्ट गार्ड की टीम ने उसे पकड़ लिया. बताया गया कि तस्करों की योजना ड्रग्स को दूसरी नाव में ट्रांसफर करने की थी. लेकिन उससे पहले ही एजेंसियों ने ऑपरेशन को अंजाम दे दिया. नाव से 526 किलो ड्रग्स बरामद हुई. इसके साथ ही पांच पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया.
526 किलो ड्रग्स की कीमत 3 हजार करोड़ से ज्यादा
एजेंसियों के मुताबिक, बरामद ड्रग्स की कुल कीमत 3 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है. यह खेप भारत में कहां पहुंचाई जानी थी और इसके पीछे कौन लोग हैं, इसकी जांच जारी है. गुजरात ATS के डीआईजी सुनील जोशी के मुताबिक, ड्रग्स को पहले तमिलनाडु ले जाने और उसके बाद पंजाब पहुंचाने की योजना थी.
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हालांकि, तमिलनाडु पहुंचने से पहले ही एजेंसियों ने खेप को पकड़ लिया. कार्रवाई के बाद नाव और बरामद ड्रग्स को मुंबई बंदरगाह लाया गया. इस पूरे ऑपरेशन में करीब 15 दिन लगे. एजेंसियों ने इनपुट मिलने के बाद समुद्री रास्ते पर निगरानी बढ़ाई और ईरानी नाव की गतिविधियों को ट्रैक किया.
आखिरकार लक्षद्वीप के पास कार्रवाई कर 526 किलो ड्रग्स की खेप जब्त कर ली गई. पांच पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. साथ ही उस नाइजीरियन नागरिक और गुजरात के वांटेड आरोपी की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिनके बीच कथित तौर पर ड्रग्स की खेप को भारत लाने को लेकर बैठक हुई थी.
ब्रिजेश दोशी