मोदी सरकार से NRU बनाने की मांग, 'युवा हल्लाबोल' ने छेड़ी मुहीम

युवा हल्लाबोल संगठन ने कहा, ऐसे वक्त में जब 45 साल की रिकॉर्डतोड़ बेरोजगारी है और हर दो घंटे में तीन बेरोजगार आत्महत्या करने को मजबूर हैं, तो ये आवश्यक है कि सरकार के पास बेरोजगारों का सही आंकड़ा हो.

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बेरोजगारों के लिए NRU बनाने की मांग बेरोजगारों के लिए NRU बनाने की मांग

पंकज जैन

  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 11:42 PM IST

  • एनआरयू की वेबसाइट भी लॉन्च
  • बेरोजगारों को अवसर देने का अभियान

बेरोजगारी के खिलाफ चल रहे आंदोलन 'युवा-हल्लाबोल' ने मोदी सरकार से नेशनल रजिस्टर ऑफ अनइम्प्लॉयड (एनआरयू) बनाने की मांग की है. दिल्ली के मयूर विहार स्थित कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में युवाओं की बजट 2020 से 6 मुख्य अपेक्षाएं भी बताई गईं. युवा-हल्लाबोल का नेतृत्व कर रहे अनुपम ने एनआरयू को देश की बड़ी जरूरत बताते हुए कहा कि "बेरोजगारी से लड़ने के प्रति अगर सरकार गंभीर है तो एनआरयू इसका पहला कदम हो सकता है. ऐसे वक्त में जब कि 45 साल की रिकॉर्डतोड़ बेरोजगारी है और हर दो घंटे में तीन बेरोजगार करने को मजबूर हैं, तो ये आवश्यक है कि सरकार के पास बेरोजगारों का सही आंकड़ा हो."

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नेशनल रजिस्टर बनाने की मांग

'युवा हल्लाबोल' के मुताबिक एनआरयू के जरिये देशभर के बेरोजगारों का भौगोलिक क्षेत्र और शैक्षणिक योग्यता के अनुसार एक नेशनल रजिस्टर बनाया जा सकता है ताकि फिर समाधान के लिए सटीक योजनाएं बनाई जा सकें. बेरोजगारी दूर करने के लिए किसी भी योजना का उचित क्रियान्वयन भी तभी हो सकता है जब सरकार के पास बेरोजगारों का आंकड़ा हो. इस मौके पर युवा-हल्लाबोल ने एनआरयू की वेबसाइट भी लॉन्च की और बेरोजगारों से पंजीकृत करवाने की अपील की. अनुपम ने बताया कि अगर आगामी बजट में सरकार एनआरयू की घोषणा नहीं करती तो युवा-हल्लाबोल के माध्यम से एनआरयू कैंप लगवाकर बेरोजगार युवाओं का रजिस्टर बनवाया जाएगा.

सरकार को भी दी जाएगी सूचना

'युवा हल्लाबोल' की ओर से जारी किए गए एनआरयू के वेबपेज को पर्चे के रूप में भी बेरोजगारों तक ले जाया जाएगा. इस मुहिम के जरिये जिन युवाओं के आंकड़े एनआरयू में पंजीकृत होंगे उनकी सूचना सरकार को भी दी जाएगी. साथ ही कुछ निजी प्रतिष्ठानों या कंपनियों से भी समन्वय बनाया जाएगा ताकि जहां कहीं भी संभव हो बेरोजगार युवाओं को अवसर प्रदान करवाया जा सके.

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अनुपम ने बताया कि से लड़ने के लिए अगर सरकार कोई इच्छाशक्ति दिखाए तो युवाओं के हित में 'युवा-हल्लाबोल' भी हरसंभव मदद करेगा. लेकिन अफसोस कि सरकार इस राष्ट्रीय आपदा से निपटने को लेकर तनिक भी गंभीर नहीं दिखती. विडंबना ये है कि समस्या से निपटना तो दूर, सरकार ये मानने को भी तैयार नहीं कि बेरोजगारी जैसी कोई समस्या है. ऐसे में एनआरयू की मुहिम शायद बेरोजगारी संकट की व्यापकता के प्रति सरकार की भी आंखें खोल सकता है.

आगामी से युवाओं की अपेक्षा गिनाते हुए अनुपम ने कहा कि हर साल बजट भाषण में यह जरूर बताया जाना चाहिए कि कितने सरकारी पद खाली पड़े हैं और उनमें समयबद्ध ढंग से भर्ती करने की क्या योजना है सरकार की. उन्होंने कहा कि यदि बजट 2020 से युवाओं की अपेक्षा पूरी नहीं होती तो युवा-हल्लाबोल देशभर में मुहिम चलाकर एनआरयू बनवाएगा और बेरोजगारी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन को युवा एकता से आगे बढ़ाएगा.

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