'शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट से नहीं सरकारी शटडाउन से...', व्यापारियों की आपत्ति पर दिपके का जवाब

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर व्यापारियों की आपत्ति के जवाब में अभिजीत दिपके ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध से नहीं, सरकारी पाबंदियों से कारोबार प्रभावित होता है. इस विवाद ने प्रदर्शन के अधिकार के साथ सुरक्षा, आवाजाही और छोटे कारोबारियों की आजीविका के सवाल को भी सामने ला दिया है.

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व्यापारियों का आरोप था कि प्रोटेस्ट की वजह से कारोबार प्रभावित हो रहा है. (Photo- PTI) व्यापारियों का आरोप था कि प्रोटेस्ट की वजह से कारोबार प्रभावित हो रहा है. (Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:27 PM IST

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर व्यापारियों और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच विवाद बढ़ गया है. कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ और खान मार्केट के व्यापारी संगठनों ने उपराज्यपाल को संयुक्त चिट्ठी लिखकर जंतर-मंतर को स्थायी रूप से नियमित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की मांग की है. खान मार्केट एसोसिएशन और दिल्ली किराना कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है. अब सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने जवाब दिया है.

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व्यापारियों की आपत्ति पर अभिजीत दिपके ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित नहीं होता. कारोबार तब प्रभावित होता है, जब सरकार पूरा शहर शटडाउन करती है, इंटरनेट सेवाएं रोकती है, नागरिकों की आवाजाही सीमित करती है और शहर को युद्ध क्षेत्र में बदल देती है.

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शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलने का दावा

अभिजीत दिपके ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी शुरुआत से गांधी के शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलती रही है. पार्टी ने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए. उन्होंने कहा कि जयपुर में उन पर हमला हुआ, लेकिन उन्होंने जवाबी कार्रवाई नहीं की. पार्टी डॉ. बीआर आंबेडकर के नेतृत्व में तैयार संविधान से मिले अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहती है.

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दिपके ने कहा कि सरकार से जवाब मांगना, अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरना और जनप्रतिनिधियों से सवाल करना अराजकता नहीं है. उनके मुताबिक, सत्ता में मौजूद पार्टी ने भी विपक्ष में रहते हुए दशकों तक प्रदर्शन किए थे. उन्होंने कहा कि नागरिक किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहते हैं. जनता की चुनी सरकार का काम लोगों को सुनना है, चुप कराना नहीं.

व्यापारियों ने सुरक्षा और आजीविका का मुद्दा उठाया

व्यापारियों का कहना है कि बैरिकेडिंग, सड़कें बंद होने और रास्ते बदले जाने से ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंच पाते. सामान की डिलीवरी और कर्मचारियों की आवाजाही भी प्रभावित होती है. उन्होंने भगदड़, आग और आपात स्थिति में एंबुलेंस तथा दमकल की गाड़ियों का रास्ता रुकने की आशंका जताई. पत्र में जुलाई 2026 और 10 अक्टूबर 2026 के प्रदर्शनों का हवाला दिया गया. इसके मुताबिक, 23 जुलाई 2026 को कारोबारियों को शाम 6:30 बजे तक प्रतिष्ठान बंद करने की सलाह दी गई थी.

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व्यापारियों ने रामलीला मैदान या बुराड़ी के किसी खुले मैदान को प्रदर्शन स्थल बनाने का सुझाव दिया. उन्होंने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की समीक्षा, प्रदर्शन स्थल बदलने की कानूनी प्रक्रिया और प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की मांग की. पत्र की प्रतियां दिल्ली पुलिस कमिश्नर, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गईं.

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सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि एनडीएमसी के सेंट्रल पार्क बंद करने से छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को नुकसान होगा. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट मामले की सुनवाई कर रहा है. जस्टिस बागची ने याचिकाओं को मिलती-जुलती बताया. कोर्ट ने कहा कि नुकसान का मुद्दा 26 तारीख को उठाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर टॉर्ट कानून के तहत मुआवजे पर विचार किया जाएगा. इस तरह विवाद में प्रदर्शन के अधिकार के साथ कारोबार, सुरक्षा और आजीविका का सवाल भी सामने है.

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