सीवर में फंसे तीन मजदूरों को बचाने उतरे थे तीन बेटियों के पिता सतीश, बाहर आई 4 लाशें

मृतक सतीश के बड़े भाई कृष्णा का कहना है कि सतीश का स्वभाव ही कुछ ऐसा था, उन्हें कहीं भी कोई अगर किसी समस्या में फंसा दिखता तो तुरंत सब कुछ छोड़ कर उसकी मदद के लिए आगे बढ़ जाते थे.

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सीवर हादसे में ई-रिक्शा चालक की भी हुई मौत सीवर हादसे में ई-रिक्शा चालक की भी हुई मौत

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2022,
  • अपडेटेड 3:19 PM IST
  • सीवर हादसे में ई-रिक्शा चालक सतीश की भी हुई मौत
  • सतीश के भाई ने कहा, किसी को मुश्किल में देखकर तुरंत मदद करने पहुंच जाता था मेरा भाई

दिल्ली के संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में सीवर में उतरे चार लोगों की मौत जहरीली गैस की वजह से हो गई जिसमें एक ई रिक्शा चालक सतीश भी शामिल हैं जिनकी उम्र 42 साल थी.

सतीश तीन बेटियों के पिता थे और अब उनके जाने के बाद परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है. सतीश सीवर में गए अन्य तीन लोगों को बचाने गए थे लेकिन जहरीली गैस ने उनकी भी जान ले ली.

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रिपोर्ट के मुताबिक मरने वालों में दो मजदूर थे जो एमटीएनएल के कॉन्ट्रैक्ट पर सीवर लाइन में तार बिछाने का काम करते थे. जानकारी के मुताबिक पहले दो लोग सीवर में गए, जब वे काफी देर बाद बाहर नहीं आए तो उन्हें देखने के लिए तीसरा शख्स भी अंदर चला गया लेकिन वो भी जहरीली गैस की चपेट में आ गया.

इसके बाद तीनों को बचाने के लिए ई-रिक्शा चालक सतीश अंदर चले गए लेकिन वो भी बाहर नहीं लौट पाए.

सतीश के अलावा किसी ने नहीं की अंदर जाने की हिम्मत

चश्मदीदों के मुताबिक जब सतीश मौके पर पहुंचे तो वहां पर लोगों की काफी भीड़ थी लेकिन अंदर जाने की हिम्मत कोई नहीं कर रहा था. सतीश ने लोगों से पूछा कि क्या हुआ है. जब लोगों ने उन्हें बताया कि 3 लोग अंदर फंस गए हैं और कोई जवाब नहीं आ रहा है तो यह सुनते ही सतीश ने तुरंत अंदर जाने का फैसला किया. 

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उन्होंने अपने पास रखे गमछे से अपना चेहरा अच्छे से बांधा ताकि गैस का असर उन पर ना हो और बिना कुछ सोचे तीनों को बचाने के इरादे से सीवर में उतर गए. लेकिन गमछा सतीश की जान नहीं बचा सका. 

तीन लोगों के साथ सतीश भी अंदर फंस गए और उनकी भी मौत हो गई. सतीश अपने पीछे 3 बेटियों को छोड़ गए हैं जिसमें सबसे बड़ी बेटी की उम्र 14 साल, दूसरी बेटी 8 साल और तीसरी बेटी महज डेढ़ साल की है.

फिलहाल उनके परिवार के लोगों को समझ में नहीं आ रहा कि अब तीन मासूम बच्चियों की देखभाल कौन करेगा. किस तरीके से इस परिवार का गुजारा होगा.

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