दिल्ली हाईकोर्ट ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ पर वकीलों को कथित रूप से धमकाने के मामले में स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा की डिवीजन बेंच ने वकीलों को इस मामले में औपचारिक याचिका दायर करने को कहा है.
वकीलों ने एसीपी की कथित टिप्पणियों का जिक्र किया, जिसमें AK-47 जिक्र और वकीलों को काले कोट के गुंडे कहने की बात शामिल है. वकीलों ने एक्टिंग चीफ जस्टिस से स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया और कहा कि इससे लीगल फ्रेटरनिटी को भरोसा मिलेगा.
वहीं, कोर्ट ने वकीलों से दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग काउंसिल (क्रिमिनल) संजय लाओ को याचिका की एक कॉपी देने के लिए भी कहा है.
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने आज यानी मंगलवार को असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर पुलिसकर्मियों के प्रोटेस्ट के बाद की गई है.
सोमवार को महिला अफसरों समेत करीब 150 दिल्ली पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन कर रहे जवानों ने मनस्वी वशिष्ठ और एक अन्य अफसर का ट्रांसफर रद्द कर उन्हें पुरानी पोस्टिंग पर दोबारा बहाल करने की मांग की थी.
बता दें, यह पूरा विवाद 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई एक घटना से शुरू हुआ, जहां वकील ललित बंसल को कथित तौर पर हाथापाई के दौरान सिर में गंभीर चोट लगी थी. घटना के बाद पुलिस स्टेशन में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव भी देखने को मिला, जिसके कारण डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू किया था.
इसके बाद, एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार के ट्रांसफर के फैसले के बाद वकीलों ने एफआईआर और शिकायतों पर दो महीने की जांच के आश्वासन पर हड़ताल वापस ली.
(Input: Shambhavi Srivastava)
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