दिल्ली में दीपावली और दशहरे पर ग्रीन पटाखों को सशर्त अनुमति देने की मांग उठी है. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर यह मांग की है. उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में पटाखों के मुद्दे पर अहम सुनवाई होनी है और अब गेंद दिल्ली सरकार के पाले में है.
बृजेश गोयल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं है और कोर्ट ने कई बार कहा है कि संतुलन जरूरी है. उन्होंने दिल्ली सरकार से सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात मजबूती से रखने और ग्रीन पटाखों की अनुमति का पक्ष लेने की मांग की.
उन्होंने कहा कि दीपावली का उल्लेख शास्त्रों और पुराणों में मिलता है. दीये जलाना, रोशनी करना और पटाखे फोड़कर खुशी मनाना सनातन संस्कृति का हिस्सा रहा है. अयोध्या में भगवान राम के आगमन पर पूरी अयोध्या को दीपों से सजाया गया था.
धार्मिक भावना भी आहत होती है
बृजेश गोयल ने कहा कि ग्रीन पटाखे सुप्रीम कोर्ट और वैज्ञानिक संस्थानों (NEERI) द्वारा प्रमाणित हैं और 30 प्रतिशत कम प्रदूषण करते हैं. उन्होंने कहा कि जब पूरा देश दीपावली पर ग्रीन पटाखों के साथ त्योहार मना रहा है, तो दिल्ली के करोड़ों हिंदुओं की आस्था का भी सम्मान होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से लाखों व्यापारियों की रोजी-रोटी पर संकट आता है और हिंदू समाज की धार्मिक भावना भी आहत होती है.
दशहरे पर रावण दहन का मुद्दा
पटाखा कारोबारियों सुनील जैन, चंद्र सेन गोयल और सुनील मित्तल ने कहा कि दशहरे पर रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि दिल्ली को छोड़कर पूरे देश में पुतलों में पटाखे लगाए जाते हैं. बिना पटाखों के पुतले जलाना असंभव है. इसलिए रावण दहन के लिए भी ग्रीन पटाखों की अनुमति दी जाए. CTI ने मांग की है कि हिंदू आस्था, परंपरा और व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में दशहरा और दीपावली पर ग्रीन पटाखों को सशर्त अनुमति दी जाए.
आशुतोष मिश्रा