चांदनी चौक के कारोबार पर संकट? लोडिंग-अनलोडिंग प्रतिबंध के खिलाफ उपराज्यपाल को ज्ञापन देंगे 4 हजार व्यापारी

पुरानी दिल्ली के बाजारों में लोडिंग-अनलोडिंग पर प्रतिबंध, अवैध रेहड़ी-पटरी और अतिक्रमण के मुद्दे पर व्यापारियों का गुस्सा बढ़ गया है. 3 सितंबर को हुई बैठक में करीब 200 व्यापारिक संगठनों ने चर्चा की. अब मंगलवार को 3 से 4 हजार कारोबारी तीर्थ राम शाह अस्पताल से मौन मार्च निकालकर दिल्ली के उपराज्यपाल को ज्ञापन सौंपेंगे.

Advertisement
सदर बाजार में कार्रवाई को लेकर भी नाराजगी.(File Photo: ITG) सदर बाजार में कार्रवाई को लेकर भी नाराजगी.(File Photo: ITG)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:46 PM IST

पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक बाजारों में लोडिंग-अनलोडिंग पर प्रतिबंध, अवैध रेहड़ी-पटरी और अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर व्यापारियों का असंतोष अब सड़क पर उतरने की तैयारी में है. व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ी इन समस्याओं के समाधान और बाजारों के कारोबार को बचाने के लिए 3 सितंबर को शाम 4 बजे एक अहम बैठक बुलाई गई. इसमें करीब 200 व्यापारिक संस्थाओं के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए.

Advertisement

दिल्ली व्यापार महासंघ और दिल्ली हिंदुस्तान मर्केंटाइल के नेतृत्व में हुई इस बैठक में पुरानी दिल्ली के अलग-अलग बाजारों से जुड़े कारोबारियों ने अपनी समस्याएं रखीं. प्रतिनिधियों ने प्रशासन से व्यावहारिक और स्थायी समाधान की मांग की. व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में कारोबार सुचारू रखने के लिए माल की आवाजाही, यातायात और अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों का संतुलित तरीके से समाधान जरूरी है.

यह भी पढ़ें: दिल्ली में बार-बार सड़क खुदाई पर लगेगी रोक, चांदनी चौक से शुरू होगा मल्टी-यूटिलिटी डक्ट सिस्टम

बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा चांदनी चौक में माल की लोडिंग और अनलोडिंग पर लगाए जा रहे प्रतिबंध का रहा. व्यापारियों ने कहा कि माल चढ़ाना और उतारना बाजारों की कारोबारी व्यवस्था का बुनियादी हिस्सा है. बिना किसी वैकल्पिक और व्यावहारिक इंतजाम के पाबंदी लगाने से दुकानदारों के साथ ट्रांसपोर्टर और ग्राहक भी प्रभावित हो रहे हैं. उनका दावा है कि इससे जरूरी सामान की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है.

Advertisement

लोडिंग-अनलोडिंग के लिए व्यापार-अनुकूल व्यवस्था की मांग

व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन से चांदनी चौक की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध और व्यापार-अनुकूल व्यवस्था बनाने की मांग की है. उनका कहना है कि बाजार में माल की आवाजाही पूरी तरह रोकने के बजाय ऐसी व्यवस्था तैयार होनी चाहिए, जिससे यातायात प्रबंधन के साथ कारोबार भी प्रभावित न हो.

बैठक में पुरानी दिल्ली के बाजारों में बढ़ती अवैध रेहड़ी-पटरी और अतिक्रमण को लेकर भी व्यापारियों ने नाराजगी जताई. दिल्ली व्यापार संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कहा कि बाजार एसोसिएशन लंबे समय से अवैध रेहड़ी-पटरी के खिलाफ शिकायतें और कार्रवाई की मांग करती रही हैं.

व्यापारियों का आरोप है कि कई इलाकों में अवैध रेहड़ी-पटरी को हटाने के बजाय दुकानदारों के छज्जे, बोर्ड और दुकानों के सामने बनी संरचनाओं पर कार्रवाई की जा रही है. उनका कहना है कि अतिक्रमण के खिलाफ अभियान सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी एक वर्ग को चुनकर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.

सदर बाजार में कार्रवाई को लेकर भी नाराजगी

व्यापारियों ने सदर बाजार की स्थिति का भी मुद्दा उठाया. उनका आरोप है कि वहां बड़ी संख्या में रेहड़ी-पटरी सड़क और बाजार के रास्तों पर अतिक्रमण कर रही हैं, लेकिन दिल्ली नगर निगम और पुलिस की ओर से उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती. इसके उलट राखी से पहले और उसके बाद सदर बाजार के दुकानदारों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई.

Advertisement

कारोबारी संगठनों ने मांग की कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई समान, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हो. उनका कहना है कि सिर्फ दुकानदारों को निशाना बनाने के बजाय अवैध रेहड़ी-पटरी और दूसरे कब्जों की समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए.

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक बाजारों में व्यापार और यातायात व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है. व्यापारियों के मुताबिक, बाजारों की व्यावसायिक जरूरतों को समझे बिना बनाए गए नियमों से कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

मंगलवार को 3-4 हजार व्यापारी निकालेंगे मौन मार्च

बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद व्यापारियों ने सर्वसम्मति से तय किया कि अपनी मांगों को लेकर आगामी मंगलवार को दिल्ली के उपराज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा. इसके लिए पुरानी दिल्ली के करीब 3 हजार से 4 हजार व्यापारी तीर्थ राम शाह अस्पताल से शांतिपूर्ण मौन मार्च निकालेंगे.

व्यापारिक संगठनों ने स्पष्ट किया कि यह मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और अनुशासित रहेगा. इसका मकसद किसी तरह का टकराव पैदा करना नहीं है. व्यापारी प्रशासन और शासन का ध्यान पुरानी दिल्ली के बाजारों से जुड़ी समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहते हैं.

कारोबारियों को उम्मीद है कि मौन मार्च और उपराज्यपाल को दिए जाने वाले ज्ञापन के बाद प्रशासन लोडिंग-अनलोडिंग, अवैध रेहड़ी-पटरी और अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाएगा. व्यापारियों का कहना है कि ऐतिहासिक बाजारों की कारोबारी जरूरतों और शहर की यातायात व्यवस्था के बीच ऐसा रास्ता निकाला जाना चाहिए, जिससे दोनों पक्षों के हित सुरक्षित रह सकें.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »