दिल्ली में बीजेपी ने शुरू किया Gen-Z सम्मेलन, युवा-छात्राओं को साधने का क्या है प्लान?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन का सियासी असर दिखने लगा है. बीजेपी ने युवाओं और छात्रों पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए दिल्ली से Gen-Z सम्मेलन शुरू किया है. इस सम्मेलन के जरिए बीजेपी युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम शुरू किया है.

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बीजेपी युवा मोर्चा के द्वारा Gen-Z सम्मेलन (Photo-X) बीजेपी युवा मोर्चा के द्वारा Gen-Z सम्मेलन (Photo-X)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:47 AM IST

पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन हुआ. विरोध प्रदर्शन के चलते ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. छात्र आंदोलन और युवा वर्ग के बीच बदलते सियासी मिजाज को भांपते हुए बीजेपी ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. बीजेपी ने दिल्ली में 'Gen-Z सम्मेलन' की शुरुआत कर दी है, जिसके जरिए युवा और छात्राओं को अपने पाले में जोड़े रखने की प्लानिंग मानी जा रही है. 

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बीजेपी के युवा मोर्चा के द्वारा दक्षिणी दिल्ली के तुगलकाबाद डीडीए ग्राउंड में GEN-Z सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद और मुख्य वक्ता के तौर पर पूर्व सांसद दक्षिणी दिल्ली के रमेश बिधूड़ी ने शिरकत किया. 

Gen-Z सम्मेलन के जरिए बीजेपी ने युवाओं की नब्ज टटोलने के लिए संवाद का एक नया कार्यक्रम शुरू किया है. इस दौरान युवाओं को 'Gen-Z' होने का असली मतलब समझाया गया ताकि उनके भीतर बीजेपी सरकार और पार्टी की नीतियों को लेकर सकारात्मक माहौल बना रहे. 

दिल्ली में बीजेपी का 'Gen-Z सम्मेलन'
बीजेपी युवा मोर्चा ने रविवार को दक्षिण दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में 'Gen-Z सम्मेलन' का आगाज किया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए. इस दौरान दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने जंतर-मंतर पर पर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन का ज़िक्र करते हुए छात्रों को गुमराह करने का आरोप लगाया गया. उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं को प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के लिए उकसाया गया. 

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आशीष सूद ने कहा कि इतिहास गवाह है कि किसी भी सरकार को बनाने में यूथ का हाथ रहा है. पहले भी सरकार में मंत्रियों के इस्तीफा हुए हैं, लेकिन क्या उससे सिस्टम बदला. सिस्टम तब बदला जब उसमें इंप्लीमेंटेशन किए गए. आज प्रश्न पत्र लीक होने पर कानून बना दिए गए, संसद में बिल पास हो गया, अब अगर इस तरह का कोई भी कार्य करता है तो उसे कठोर सजा मिलेगी तो यह सिर्फ मोदी सरकार में ही मुमकिन था.

क्यों पड़ी 'Gen-Z' को साधने की जरूरत? 
हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक के मुद्दे पर शुरू छात्र आंदोलन देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल गया था. इस आंदोलन को Gen-Z का नाम दिया गया था. Gen-Z मतलब 1996 से 2012 के बीच जन्मे युवा. प्रतियोगी परीक्षाओं, शिक्षा सुधारों और रोजगार के मुद्दों को लेकर छात्र युवा सड़कों पर उतरे थे. मोदी सरकार बनने के बाद पहली बार युवा विरोध प्रदर्शन किए, जो पार्टी के लिए चिंता का सबब बन गई थी. छात्र आंदोलन के दबाव में ही धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. इस आंदोलन में कई बीजेपी नेताओं के बच्चे भी शामिल हुए थे. 

बीजेपी की जीत में सबसे अहम रोल युवा वोटर्स का रहा है, लेकिन 12 साल के बाद नाराजगी बढ़ रही है. इसीलिए छात्र सड़क पर उतरे.राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पारंपरिक राजनीतिक भाषणों और रैलियों से अब इस आधुनिक पीढ़ी को आकर्षित करना मुश्किल है. बीजेपी का प्रयास Gen-Z को यह समझाना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में युवाओं के लिए अवसरों के द्वार कैसे खुले हैं, चाहे डिजिटल इंडिया हो, स्टार्टअप कल्चर हो या अंतरिक्ष और खेलकूद के क्षेत्र में मिलती सफलताएं.

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बीजेपी का युवाओं से संवाद कार्यक्रम
बीजेपी के युवा मोर्चा ने युवाओं और छात्रों की नब्ज टटोलने के लिए संवाद के लिए Gen-Z सम्मेलन शुरू किया है ताकि युवा पीढ़ी को सकारात्मक रूप से पार्टी के साथ जोड़े रखा जा सके. इस तरह युवाओं और खासकर कॉलेज जाने वाली छात्राओं के साथ सीधा संवाद का कार्यक्रम है. शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि 'Gen-Z' आंदोलन का असली मकसद समझाया और बताया कि कैसे जंतर-मंतर पर भारत सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री के लिए गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया.

बीजेपी नेताओं ने कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बताया कि पढ़ाई के दौरान ज्यादा ध्यान अपनी पढ़ाई पर देना चाहिए. आवाज उठाने का सबको हक हासिल है, लेकिन सही तरीके से. इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रोटेस्ट को शांतिपूर्ण तरीके से मर्यादा में रहकर भी कर सकते हैं,क्योंकि देश में किसी भी सरकार के लिए यूथ की भागीदारी बहुत अहम रखती है.

युवाओं पर पकड़ बनाए रखने का दांव
दिल्ली की सियासत में बीजेपी बहुत लंबे अर्से के बाद सत्ता में आई है, जिसमें मध्यम वर्ग और युवा मतदाता किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं. बीजेपी की सियासी ताकत युवा हैं. ऐसे में विपक्षी दल भी लगातार युवा वर्ग के मुद्दों को भुनाने की कोशिश में हैं, ऐसे में बीजेपी द्वारा Gen-Z सम्मेलन शुरू किया जाना यह साफ दिखाता है कि पार्टी चुनावों से पहले वैचारिक मोर्चे पर कोई ढील नहीं छोड़ना चाहती.

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 बीजेपी का यह 'मॉडर्न आउटरीच प्रोग्राम' राजधानी की युवा पीढ़ी और छात्राओं को जोड़ने का है. बीजेपी ने दिल्ली से शुरू किया है, क्योंकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवा आंदोलन हुआ था. छात्राओं और युवतियों के बीच पैठ मजबूत करने के लिए आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें दिल्ली में महिला सुरक्षा, उच्च शिक्षण संस्थानों में मिलने वाली सुविधाओं और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स पर फोकस किया जा रहा है.

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