आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक बार फिर अरविंद केजरीवाल को अपना राष्ट्रीय संयोजक चुना है. बुधवार को पार्टी की नेशनल काउंसिल की वर्चुअल बैठक हुई. इसमें केजरीवाल को सर्वसम्मति से इस पद के लिए चुना गया. बैठक में 330 सदस्यों ने हिस्सा लिया. पार्टी ने इस दौरान नई 23 सदस्यीय नेशनल एग्जिक्युटिव का भी गठन किया.
पार्टी ने पंकज गुप्ता को नया नेशनल सेक्रेटरी चुना है. वहीं एनडी गुप्ता नेशनल ट्रेजरर के पद पर बने रहेंगे. नई नेशनल एग्जिक्युटिव में कुल 23 सदस्य होंगे. पार्टी ने इसे संगठन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया है.
AAP के नेशनल मीडिया इंचार्ज अनुराग ढांडा ने केजरीवाल को दोबारा राष्ट्रीय संयोजक चुने जाने पर बधाई दी. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है.
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चुनावी झटकों के बीच एक बार फिर मिली कमान
आम आदमी पार्टी को पिछले कुछ सालों में कई चुनावों में झटके लगे हैं. इसके बावजूद केजरीवाल पार्टी का नेतृत्व करते रहे हैं. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल राजनीति में आने से पहले सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे थे.
उन्होंने पारदर्शिता, सूचना के अधिकार और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में काम किया. राजनीति में आने से पहले उन्होंने 'परिवर्तन' नाम की संस्था भी बनाई थी. यह संस्था लोगों की शिकायतों को उठाने का काम करती थी. इसमें राशन व्यवस्था, सरकारी काम, सामाजिक योजनाओं, इनकम टैक्स और बिजली से जुड़े मामले शामिल थे.
केजरीवाल ने 2006 में इनकम टैक्स विभाग से इस्तीफा दे दिया था. इसी साल उन्हें रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड मिला था. उन्होंने अवॉर्ड की राशि से पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की. भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान केजरीवाल एक प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए. इसके बाद उन्होंने 2 अक्टूबर 2012 को आम आदमी पार्टी की स्थापना की. उनके साथ इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन से जुड़े कई लोग भी पार्टी बनाने में शामिल हुए.
शीला दीक्षित को हराकर पहली बार बने विधायक
केजरीवाल ने 2013 में पहली बार दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा. उन्होंने नई दिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरकर तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराया. केजरीवाल ने उन्हें 22 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था.
इसके बाद 28 दिसंबर 2013 को उन्होंने पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उस समय वह दिल्ली के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्रियों में शामिल थे. हालांकि, उनकी सरकार ज्यादा समय तक नहीं चली. जन लोकपाल बिल पास नहीं होने के बाद उन्होंने फरवरी 2014 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
इसके बाद 14 फरवरी 2015 को केजरीवाल ने दोबारा दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP को बड़ी जीत मिली थी. इसके बाद केजरीवाल फिर नई दिल्ली सीट से विधायक चुने गए.
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अब एक बार फिर पार्टी की कमान राष्ट्रीय स्तर पर उनके हाथों में है. नेशनल काउंसिल की बैठक में सर्वसम्मति से उनका चयन पार्टी के अंदर उनके नेतृत्व को मिली सहमति को दिखाता है. नई 23 सदस्यीय नेशनल एग्जिक्युटिव के गठन के साथ AAP ने संगठन को आगे की राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने का संकेत दिया है.
अमित भारद्वाज