1600 डिग्री का पिघला लोहा गिरा, शरीर में लगी आग, जान बचाने भागा ठेकेदार, कैमरे में कैद मौत का मंजर, वीडियो वायरल

दुर्ग जिले के रसमड़ा स्थित जेडी स्टील प्लांट में 17 अक्टूबर की रात 1600 डिग्री सेल्सियस तक गर्म पिघला लोहा गिरने से ठेकेदार संतोष श्रीवास्तव की मौत हो गई. घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह आग की चपेट में आने के बाद बचने के लिए भागते दिखाई देते हैं. पुलिस ने प्लांट प्रबंधन और ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

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स्टील प्लांट में मौत का खौफनाक मंजर.  (Photo: Screengrab) स्टील प्लांट में मौत का खौफनाक मंजर. (Photo: Screengrab)

रघुनंदन पंडा

  • दुर्ग ,
  • 22 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:57 PM IST

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक स्टील प्लांट के भीतर हुए भीषण हादसे का वीडियो सामने आया है. वीडियो में एक व्यक्ति गर्म पिघले लोहे की चपेट में आने के बाद खुद को बचाने के लिए भागता नजर आ रहा है. यह हादसा बोरई-रसमड़ा स्थित जेडी स्टील प्लांट में हुआ, जहां करीब 1500 से 1600 डिग्री सेल्सियस तापमान वाला पिघला लोहा ठेकेदार संतोष श्रीवास्तव के ऊपर गिर गया. वह बुरी तरह झुलस गए. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. घटना 17 अक्टूबर 2026 की रात की बताई गई है. पुलिस ने मामले की जांच के बाद प्लांट प्रबंधन और एक ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. वहीं, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने हादसे से जुड़े उपकरणों के परीक्षण और संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. प्लांट प्रबंधन को सुरक्षा ऑडिट कराने और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए गए हैं.

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पुलिस के अनुसार, संतोष कुमार श्रीवास्तव की उम्र 47 वर्ष थी और वह बिहार के रहने वाले थे. वह जेडी स्टील प्लांट में ठेकेदारी का काम करते थे. यहां इंडक्शन फर्नेस में पिघली धातु से बिलेट बनाने का काम किया जा रहा था. 17 अक्टूबर की रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच प्लांट में मशीन से जुड़ा परीक्षण कार्य चल रहा था. औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 15 टन क्षमता वाली फर्नेस से करीब 1600 डिग्री सेल्सियस तापमान की पिघली धातु टंडिश कार में डाली जा रही थी.

इसी दौरान पर्जिंग प्रक्रिया में अत्यधिक लांसिंग और नोजल में रुकावट के कारण टंडिश की बॉटम प्लेट फट गई. इसके बाद गर्म पिघली धातु संतोष श्रीवास्तव के ऊपर गिर गई. वह इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए. पुलिस के मुताबिक, हादसे के बाद संतोष को तत्काल इलाज के लिए भिलाई के सेक्टर-9 स्थित जवाहरलाल नेहरू अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन 17 अक्टूबर को दोपहर करीब 3:30 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव बिहार ले गए.

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आग की चपेट में आने के बाद बचने के लिए भागे

इस हादसे का वीडियो भी सामने आया है. बताया गया है कि घटना के समय प्लांट में मौजूद किसी मजदूर ने यह वीडियो बनाया था. फुटेज में गर्म पिघले लोहे की चपेट में आने के बाद संतोष खुद को बचाने के लिए भागते दिखाई देते हैं. यह वीडियो पुलिस की जांच में अहम कड़ी माना जा रहा है. घटना के दौरान क्या हुआ और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जांच की जा रही है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मशीन से पिघला लोहा बाहर निकलने और ठेकेदार के इसकी चपेट में आने के पीछे क्या कारण थे. पुलिस के अनुसार, हादसे में सुरक्षा इंतजामों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है.

शुरुआत में अंजोरा चौकी पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी. बाद में जांच के आधार पर जेडी स्टील इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक शिव कुमार गोयल और ठेकेदार गजानन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 289 और 106(1) के तहत एफआईआर दर्ज की है. पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में प्लांट के संचालन के दौरान लापरवाही और उससे हुई मौत से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई. फिलहाल मामले की विवेचना जारी है. इस मामले में दुर्ग-भिलाई के एएसपी शोभराज अग्रवाल ने बताया कि रसमड़ा स्थित जेडी इस्पात फैक्ट्री में मशीन से पिघला हुआ पदार्थ अधिक मात्रा में निकलने के कारण संतोष गंभीर रूप से झुलस गए थे. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. जांच के बाद प्लांट प्रबंधन और ठेकेदार के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है.

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घटना के बाद औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग, दुर्ग संभाग ने संबंधित फर्नेस, लैडल, टंडिश कार, नोजल और कंटीन्यूअस कास्टिंग मशीन यानी सीसीएम से जुड़े परीक्षण और संचालन कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया है. विभाग ने व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता, 2020 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है. प्लांट प्रबंधन को सक्षम तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से सुरक्षा ऑडिट कराने और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं. आदेश में यह भी कहा गया है कि संचालन पर रोक से प्रभावित श्रमिकों को वेतन और अन्य लाभ दिए जाएं. जहां संभव हो, उन्हें वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं.

सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

इस हादसे ने प्लांट में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. एएसपी शोभराज अग्रवाल के अनुसार, संतोष प्लांट में ठेकेदारी का काम करते थे और पिघली धातु से बिलेट बनाने की प्रक्रिया के दौरान हादसे का शिकार हुए. उन्होंने यह भी कहा कि घटना के समय सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता से जुड़ा पहलू जांच के दायरे में है. फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों, जिम्मेदारी और सुरक्षा इंतजामों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. वहीं, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने संबंधित मशीनों के परीक्षण और संचालन पर रोक लगाकर सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं.
 

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