130 साल तक गांव के तालाब में रहा 'गंगाराम'... मौत पर नहीं जला चूल्हा, शांत स्वभाव वाले मगरमच्छ की कहानी

मगरमच्छ... नाम सुनते ही लोग घबरा जाएं. लेकिन क्या कोई मगरमच्छ ऐसा भी हो सकता है, जिसकी मौत पर पूरा गांव शोक में डूब जाए? जिसके जाने के बाद किसी घर में चूल्हा न जले और पूरा गांव उसे अंतिम विदाई दे. छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के गांव का 'गंगाराम' ऐसा ही मगरमच्छ था. 130 साल तक तालाब में रहने वाले गंगाराम की कहानी बच्चे अब किताबों में पढ़ेंगे.

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मगरमच्छ की मौत पर पूरे गांव में मनाया गया था मातम. (Photo: Screengrab) मगरमच्छ की मौत पर पूरे गांव में मनाया गया था मातम. (Photo: Screengrab)

सूरज सिन्हा

  • बेमेतरा,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

मगरमच्छ... यानी ऐसा जीव, जिससे लोग दूर रहना ही बेहतर समझते हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले का बावा मोहतरा गांव इस सोच को बदल देता है. यहां एक मगरमच्छ था, जिसका नाम था गंगाराम... गांव वाले उसे अपने परिवार का सदस्य मानते थे. कहते हैं, करीब 130 साल तक तालाब में रहने वाले गंगाराम ने कभी किसी इंसान पर हमला नहीं किया. 2019 में उसकी मौत हुई तो पूरे गांव ने शोक मनाया, चूल्हे नहीं जले और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. अब यही कहानी किताबों का हिस्सा बनने जा रही है.

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हमने इंसानों और जानवरों की दोस्ती की कई कहानियां सुनी हैं. कुत्ते, हाथी, घोड़े या डॉल्फिन की भी. लेकिन क्या कभी किसी मगरमच्छ और पूरे गांव की दोस्ती के बारे में सुना है? छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले का बावा मोहतरा गांव ऐसी ही एक कहानी अपने साथ लिए हुए है. यहां गांव के बीच बने एक तालाब में एक मगरमच्छ रहता था. गांव वालों ने उसका नाम रखा था- गंगाराम...

यह इंसानी नाम भले ही मगरमच्छ का रखा गया था, लेकिन गांव वालों के लिए वह किसी जंगली जानवर से ज्यादा परिवार का सदस्य था. ग्रामीण बताते हैं कि गंगाराम करीब 130 साल तक उसी तालाब में रहा. इतने लंबे समय में गांव की कई पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन गंगाराम वहीं रहा.

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गांव वालों का दावा है कि इतने वर्षों में गंगाराम ने कभी किसी इंसान पर हमला नहीं किया. महिलाएं उसी तालाब से पानी भरती थीं. किसान अपने मवेशियों को वहीं पानी पिलाते थे. बच्चे तालाब के किनारे खेलते थे. मगरमच्छ भी वहीं रहता था, लेकिन इंसानों और उसके बीच एक अनकहा भरोसा बना रहा.

धीरे-धीरे गंगाराम सिर्फ गांव की पहचान नहीं, बल्कि पूरे इलाके की चर्चा बन गया. वन्यजीव विशेषज्ञ और पर्यटक भी इस अनोखी कहानी को देखने बावा मोहतरा पहुंचने लगे. इंसान और एक मांसाहारी वन्यजीव के बीच ऐसा रिश्ता बेहद दुर्लभ माना जाता है.

फिर आया साल 2019... गंगाराम की मौत हो गई. गांव वालों के लिए यह किसी अपने के चले जाने जैसा था. ग्रामीणों ने उसका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया. शोक में पूरे गांव में उस दिन किसी घर में चूल्हा तक नहीं जला. गंगाराम की अंतिम विदाई की तस्वीरें उस समय देशभर में वायरल हुई थीं.

अब गंगाराम की कहानी गांव की यादों से निकलकर देशभर के स्कूलों तक पहुंच रही है. NCERT ने अपने पाठ्यक्रम के 'My India! – A Bond Between Humans and Animals' शीर्षक के तहत इस अनोखी मिसाल को जगह दी है. इसमें बताया गया है कि बावा मोहतरा के लोगों ने कैसे एक मगरमच्छ के साथ ऐसा रिश्ता बनाया, जो आज की दुनिया में बेहद असामान्य है.

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