दूर रहकर भी माँ-पापा तक पहुँचा बेटे का प्यार, एक ऑर्डर ने जोड़ दीं तीन ज़िंदगियाँ

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घर से शुरू हुए सपने, कई घरों तक पहुँची रोज़ी-रोटी

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:33 PM IST
  • कानपुर में रहने वाले शिवांग ने दिवाली पर घर न जा पाने की कमी, माँ-पापा के लिए तोहफ़ा भेजकर पूरी की।
  • घर से शुरू हुआ आयुष गुप्ता का काम आज बीस लोगों की टीम और अपने ट्रेडमार्क तक पहुँच चुका है।
  • पायल पहले अपना घर संभालती हैं, फिर Wishmaster बनकर किसी और के घर की ख़ुशी पहुँचाती हैं।

कानपुर में रहने वाला शिवांग इस बार दिवाली पर घर नहीं जा पाया। फ़ोन पर माँ की थकी आवाज़ सुनी, तो उसने वही किया जो वो दूर रहकर कर सकता था। उसने अपने मम्मी-पापा के लिए एक छोटा-सा तोहफ़ा भेज दिया।

माँ ने बताया था कि दिवाली आ रही है और वो और पापा मिलकर घर की साफ़-सफ़ाई कर रहे हैं। थोड़ा थक जाते हैं बस। शिवांग ने मन में सोचा कि मैं वहाँ होता, तो उनकी मदद कर देता। घर तो नहीं जा सकता था, इसलिए उसने उनके लिए एक प्रीमियम मॉप मशीन ऑर्डर कर दी। उसे पता था कि ये बहुत बड़ी चीज़ नहीं है, पर कुछ नहीं से तो अच्छा है।

ग़ाज़ियाबाद में आयुष गुप्ता के लिए वो बस एक ऑर्डर नहीं था। अपने घर से शुरू हुआ आयुष प्रीमियम का काम आज बीस लोगों की टीम बन चुका है। 2022 में आयुष ने अपने घर से ही Flipkart पर अपने प्रोडक्ट बेचना शुरू किया था। तब घरवाले साथ थे, कोई पैकिंग करता था, कोई हिसाब देखता था। आज उनके नाम का ट्रेडमार्क है, और बिग बिलियन डेज़ के दिनों में उनका बिज़नेस आम दिनों के मुक़ाबले क़रीब तीन गुना हो जाता है। आयुष कहते हैं कि सिंपल ऑनबोर्डिंग, जल्दी आने वाला पेमेंट और हर तरह के सेलर को आगे बढ़ने का बराबर मौक़ा, यही बातें उन्हें इस प्लेटफ़ॉर्म पर सबसे अच्छी लगीं।

उनके यहाँ से निकला वो डिब्बा Ekart के नेटवर्क से होता हुआ हब तक पहुँचा। और उसे फ़तेहपुर तक पहुँचाती हैं पायल। वो पहले अपना घर संभालती हैं, फिर किसी और के घर की ख़ुशी लेकर निकल पड़ती हैं। पायल कोविड के समय से Wishmaster का काम कर रही हैं। उससे पहले वो एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थीं, पर कमाई कम थी और समय बँधा हुआ था। आज उनका पूरा परिवार उनकी कमाई पर टिका है। मोहल्ले में लोग उन्हें "Flipkart वाली दीदी" के नाम से पहचानते हैं।

दरवाज़े पर पायल से पार्सल लेकर शिवांग की माँ हैरान रह गईं। उन्होंने तो कुछ मँगवाया ही नहीं था। जब डिब्बा खुला, तो उनके मुँह से निकला, "अरे, ये यहाँ कैसे आ गया? ये तो बड़े शहरों वाली मशीन लगती है!" शिवांग को फ़ोन लगाया, तो पता चला कि ये उसी का सरप्राइज़ था। माँ ने बेटे को भी थैंक यू कहा, और पायल को भी।

"घर से घर तक" उन तीन लोगों की कहानी है, जिन्हें एक ऑर्डर ने जोड़ दिया: एक बेटा, एक सेलर और एक Wishmaster।
इस The Big Billion Days 2026, जब आप अपनों के लिए कुछ चुनें, तो एक बार ये ज़रूर सोचिए। हर डिब्बे के पीछे किसी की मेहनत होती है, किसी की उम्मीद होती है, और कोई परिवार होता है, जो उसे आपके दरवाज़े तक पहुँचाता है।

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