हर इंसान को दर्द होता है, हालांकि दर्द की तीव्रता भले ही कम-ज्यादा हो सकती है. मगर दर्द हर किसी को होता है, पुरुषों और महिलाओं दोनों के ही शरीर में दर्द महसूस होता है,लेकिन क्या पुरुषों और महिलाओं में इसे महसूस करने का तरीका अलग होता है? महिलाओं और पुरुषों की बॉडी में दर्द को लेकर एक ग्लोबल स्टडी में शॉकिंग बात सामने आई है.
हाल ही में नेचर मेडिसिन जर्नल में पब्लिश एक बड़ी ग्लोबल स्टडी ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया भर में महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक शारीरिक दर्द का सामना करती हैं. दुनिया भर के शोधकर्ताओं ने 'दर्द से जुड़ी महामारी विज्ञान' के क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़ी स्टडी को पूरा किया है.
यह रिसर्च 1990 से 2025 के बीच 118 देशों के 60 लाख से ज्यादा लोगों के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें 5 वर्ष के बच्चों से लेकर 100 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग शामिल थे.
11 हिस्सों में महिलाओं को होता है ज्यादा दर्द
शोधकर्ताओं ने शरीर के 11 प्रमुख हिस्सों जैसे सिर, चेहरा, गर्दन/कंधा, हाथ/कलाई, कोहनी, छाती, पेट, पीठ, कूल्हा, पैर, टखना और घुटने में दर्द पर स्टडी की थी. जिसमें सामने आया हैं कि सभी 11 हिस्सों में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में ज्यादा दर्द दर्ज कराया. खासतौर पर सिरदर्द, चेहरे के दर्द और पेट दर्द के मामलों में महिलाओं और पुरुषों के बीच फर्क सबसे ज्यादा पाया गया.
महिलाओं के दर्द की होती है अनदेखी
यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के प्रोफेसर एंड्रयू हॉर्न और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर रेबेका स्लेटर के अनुसार, यह रिसर्च जेंडर पेन गैप यानी महिला और पुरुष के दर्द में असमानता का ठोस प्रमाण है.
स्टडी में यह भी सामने आया है कि महिलाओं के दर्द को अक्सर क्लीनिकों में गंभीरता से नहीं लिया जाता, उसकी अनदेखी की जाती है या उन्हें पर्याप्त दर्द निवारक दवाएं नहीं दी जाती हैं.
उम्र और लाइफस्टाइल का दर्द पर असर
स्टडी में पाया गया है कि महिलाओं और पुरुषों में 55 साल की उम्र से पहले दर्द में बढोत्तरी दर्ज की गई और 75 साल की उम्र के आसपास यह अपने चरम पर पहुंचता है. स्टडी में शामिल लगभग 40 प्रतिशत लोगों ने पीठ दर्द की शिकायत की, जबकि चेहरे का दर्द सबसे कम 2 प्रतिशत दर्ज किया गया.
सिर, चेहरे और पेट का दर्द लाइफ की मिडिल एज में चरम पर पहुंचकर घटने लगता है, जबकि पीठ, कूल्हे और घुटने जैसे वजन उठाने वाले जोड़ों का दर्द उम्र बढ़ने के साथ लगातार बढ़ता जाता है.
धूम्रपान, मोटापा और गरीबी है दर्द का कारण!
दुनिया भर में दर्द के बोझ का 18.3 प्रतिशत हिस्सा तीन प्रमुख सामाजिक और स्वास्थ्य कारणों धूम्रपान, मोटापा और गरीबी से जुड़ा होता है. कम मानव विकास सूचकांक (Low Human Development Index - HDI) वाले गरीब इलाकों में बुजुर्गों को पीठ के निचले हिस्से में दर्द अमीर इलाकों की तुलना में लगभग दोगुना झेलना पड़ता है.
आजतक हेल्थ डेस्क