विशाखापट्टनम में एलकेजी में पढ़ने वाले एक 6 साल के बच्चे की कथित तौर पर टीचर की डांट और थप्पड़ के बाद मौत हो गई. इस घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है. शुरुआती जांच में पता चला है कि बच्चे की मौत का कारण हार्ट अटैक हो सकता है. हालांकि अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आनी बाकी है, लेकिन इस घटना से एक सवाल यह उठ रहा है कि क्या इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक आ सकता है. ऐसा क्या हुआ कि टीचर की डांट से बच्चा बेहोश हो गया और फिर उसकी मौत हो गई?
6 साल के बच्चे में डांट या थप्पड़ के बाद अचानक बेहोश होने के कई कारण हो सकते हैं. कुछ बच्चों में जन्म से ही दिल की बीमारियां होती हैं, लेकिन उनके लक्षणों का पता नहीं चलता है. लेकिन जब किसी स्ट्रेस से शरीर में अचानक एड्रेनालिन बढ़ता है तो इससे धड़कन एकदम तेज हो जाती है. बीपी में बदलाव आता है, जिससे हार्ट पर असर पड़ता है. कुछ मामलों में ये कार्डियक अरेस्ट का कारण भी बन सकता है. इसमें हार्ट अचानक काम करना बंद कर देता है.
क्या डर से आ सकता है हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट?
मेदांता मेडिसिटी मूलचंद हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक आने के मामले बहुत ही कम होते हैं. विशाखापट्टनम के इस केस में हार्ट अटैक से मौत कहना मेडिकल साइंज के लिहाज से ठीक नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि 6 साल की उम्र में हार्ट की नस ब्लॉकेज वाली कंडीशन मुश्किल ही होती है. ऐसे मामलों में जन्म से हुई दिल की बीमारी, कार्डियोमायोपैथी या दिल की धड़कन की गड़बड़ी एक फैक्टर हो सकती है.
डॉ तरुण कहते हैं कि ऐसे मामलों में हार्ट अटैक नहीं बल्कि कार्डियक अरेस्ट जानलेवा हो सकता है. जब किसी घटना से बहुत ज्यादा तनाव हो जाए तो वह शरीर में एड्रेनालाईन को बढ़ा देता है तो अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, यह हार्मोन दिल की धड़कन को तेज करता है और ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, कमजोर दिल वाले लोगों में, इस अचानक तेजी के कारण खतरनाक इलेक्ट्रिकल रिदम हो सकता है, जिससे दिल धड़कना बंद कर देता है, जो मौत का कारण बन सकता है.
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न्यूरो समस्या भी हो सकती है कारण
डॉ तरुण कहत हैं कि बच्चे के अचानक बेहोश होने का कारण कोई दौरा या दूसरी न्यूरोलॉजिकल कंडीशन हो सकती है. इसलिए इस घटना को केवल हार्ट अटैक मानना अभी ठीक नहीं है. घटना देखकर ये मामला हार्ट अटैक का नहीं कार्डियक अरेस्ट का ही लगता है, लेकिन फिलहाल इस केस में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट और कार्डियक बीमारियों की जांच से ही मौत का सही कारण पता चलेगा, केवल CCTV देखकर ही कोई एक कारण मानना मेडिकल साइंस के हिसाब से ठीक नहीं है.
जेनेटिक बीमारियां हो सकती हैं जानलेवा
इस मामले में राजीव गांधी अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ अजीत कुमार कहते हैं कि कुछ बच्चों में जन्म से लॉन्ग-क्यूटी सिंड्रोम और ब्रुगाडा सिंड्रोम जैसी जेनेटिक दिल बीमारियों होती हैं. जब किसी को ज्यादा मानसिक तनाव होता है तो फिर इससे दिल की धड़कन अचानक तेजी से बढ़ जाती है, जिससे हार्ट पर बहुत प्रेशर पड़ता है. कुछ मामलों में ये जानलेवा हो सकता है, हालांकि विशाखापट्टनम वाली इस घटना में मौत का सही कारण पोस्टमार्टम आने के बाद ही पता चलेगा.
कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में क्या है अंतर
हार्ट अटैक हार्ट में खून के सर्कुलेशन की एक समस्या'है जिसमें हार्ट की नस में ब्लॉकेज होने के कारण खून का दौरा रुक जाता है और अटैक आ जाता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट दिल की 'इलेक्ट्रिकल समस्या' है जिसमें दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है और शरीर में खून पंप होना रुक जाता है. कार्डियक अरेस्ट हार्ट अटैक से ज्यादा खतरनाक होता है. इसमें अधिकतर मामलों में इलाज न मिलने से मौत हो जाती है.
आजतक हेल्थ डेस्क