अगर आपका बच्चा फोन ज्यादा चलाता है. टीवी के सामने बैठा रहता है और बाहर खेलने के नाम पर बहाने बनाने लगता है, तो यह सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि उसकी आंखों के लिए भी खतरनाक हो सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की इन खराब आदतों से उनको मायोपिया की बीमारी हो रही है. इसमें पास की चीजें तो साफ दिखाई देती हैं, लेकिन दूर की चीजें धुंधली नजर आती हैं. आम भाषा में इसे नजर कमजोर होना कहते हैं. ये बीमारी बच्चों में तेजी से बढ़ रही है. हालांकि अगर आप अपने बच्चे को रोज बाहर खेलने भेजते हैं तो इससे बचाव किया जा सकता है.
क्यों होती है मायोपिया की समस्या
यह समस्या तब होती है, जब आंख का आकार सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसी स्थिति में आंख में आने वाली रोशनी रेटिना पर फोकस होने के बजाय उससे पहले ही फोकस हो जाती है. इससे होता ये है कि दूर की चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं और बच्चे को चश्मे की जरूरत पड़ने लगती है.
Pubmed की रिपोर्ट बताती है कि भारत में मायोपिया के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, खासकर बच्चों में ज्यादा केस आ रहे हैं. रिपोर्ट बताती है भारत में 5 से 15 साल के शहरी बच्चे में साल 1999 में मायोपिया की दर लगभग 4.4% थी, जो हाल ही में बढ़कर 21% से ज़्यादा हो गई है. अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो 2050 तक भारत के लगभग 23% से 50% बच्चे इससे प्रभावित हो सकते हैं. एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि भारत आंखों की बीमारी मायोपिया अब एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है.
देश में क्यों बढ़ रही मायोपिया की बीमारी
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के डॉ. ए.के. ग्रोवर ने Aajtak.in से बातचीत में बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बच्चों में मायोपिया के मामले तेजी से बढ़े हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह कम उम्र में स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल और खेलकूद की कमी है. कई वैज्ञानिक शोध भी यह साबित कर चुके हैं कि जो बच्चे बाहर खेलते हैं, उनमें मायोपिया यानी नजर कमजोर होने का खतरा कम होता है.
डॉ. ग्रोवर कहते हैं कि कुछ साल पहले तक बच्चे स्कूल के बाद मैदान में खेलते थे, लेकिन अब उनकी दुनिया मोबाइल, वीडियो गेम और सोशल मीडिया तक सिमटती जा रही है. अब बच्चे टैबलेट और लैपटॉप पर ज्यादा समय बिताते हैं, जो आंखों को नुकसान कर रहा है.
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बाहर खेलने से कैसे कम होता है मायोपिया का खतरा?
डॉ. ग्रोवर बताते हैं कि कई रिसर्च हुई हैं और साइंटिफिक प्रूफ भी मौजूद हैं जो बताते हैं कि बाहर खेलने से दूर की नजर कमजोर होने से बचाया जा सकता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब बच्चे बाहर खेलते हैं, तो उनकी आंखें अलग-अलग दूरी पर मौजूद चीजों पर फोकस करती हैं. इससे आंखों पर लगातार पड़ने वाला दबाव कम होता है. इसके अलावा, प्राकृतिक रोशनी आंखों के सामान्य विकास में भी मदद करती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि सूरज की रोशनी आंखों में ऐसे केमिकल को एक्टिव करती है, जो आंख की लंबाई को असामान्य रूप से बढ़ने से रोक सकते हैं. जिससे मायोपिया का खतरा भी कम हो जाता है.
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माता-पिता क्या करें?
डॉ. ग्रोवर के मुताबिक, बच्चों को सिर्फ स्क्रीन से दूर रखने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनको रोज कम से कम 1 से 2 घंटे बाहर खेलने जरूर भेजें
स्क्रीन टाइम सीमित करें
लगातार स्क्रीन देखने के बीच ब्रेक दिलाएं
बच्चों की आंखों की नियमित जांच कराएं
आजतक हेल्थ डेस्क