नोएडा में आयोजित इंडिया टुडे हेल्थवेल्थ समिट 2026 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था, सरकारी खर्च और इलाज को आम लोगों तक पहुंचाने के रोडमैप पर खुलकर बात की. नड्डा ने कहा कि सरकार सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि बीमारी की समय रहते पहचान पर भी जोर दे रही है. आयुष्मान भारत योजना के तहत स्क्रीनिंग और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है ताकि गंभीर बीमारियों का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सके.
छोटे शहरों तक पहुंचेगा विशेषज्ञ इलाज
एम्स दिल्ली पर बढ़ते दबाव और टियर-2-टियर-3 शहरों में विशेषज्ञ इलाज की कमी के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में मेडिकल कॉलेजों का बड़ा विस्तार किया गया है. उनके अनुसार, जिन जिलों में पहले कोई सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज नहीं था, वहां नए कॉलेज खोले गए है. उन्होंने बिहार के सीवान और पूर्णिया, झारखंड के दुमका, देवघर और डाल्टनगंज जैसे उदाहरण दिए. उनके मुताबिक, हर नए मेडिकल कॉलेज के साथ एमबीबीएस सीटें, नर्सिंग सीटें और पीजी सीटें जुड़ती हैं, जिससे भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होते हैं.
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एम्स दिल्ली जैसा स्तर बनाने में लगेगा समय
जब उनसे पूछा गया कि कई जटिल सर्जरी, जैसे बच्चों की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए अभी भी एम्स दिल्ली में महीनों इंतजार करना पड़ता है, तो उन्होंने माना कि सभी नए एम्स को दिल्ली एम्स जैसा बनने में समय लगेगा. लेकिन सरकार धीरे-धीरे विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार कर रही है. देश में कई नए एम्स खोले गए हैं और वहां मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं.
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आयुष्मान भारत योजना से जुड़ी शिकायतों का हो रहा समाधान
आयुष्मान भारत योजना से जुड़ी शिकायतों के सवाल के बारे में जेपी नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए राज्यों और जिलों में कमेटियां बनाई गई हैं. उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों की ओर से कम भुगतान का हवाला देकर इलाज से इनकार करने जैसी शिकायतों पर जिला स्तर पर समाधान का प्रयास किया जाएगा. अधिकतम एक महीने में जवाब देने की व्यवस्था की गई है.
आजतक हेल्थ डेस्क